बहुचर्चित विनेश फोगाट वीरगाथा का पटाक्षेप हो गया है l तमाम उतार चढ़ाओँ के बाद विनेश को युवा और उभरती हुई पहलवान मीनाक्षी के हाथों हार का सामना करना पड़ा l हो सकता है कि विनेश के कुछ विरोधियों के दिल को ठंडक पहुंची होगी l कुछ एक को विनेश की हार में अपनी जीत और प्रतिशोध नजर आ रहा होगा l लेकिन सच्चाई यह है कि विनेश की हार में भी बड़ी जीत छिपी है l ऐसी जीत जिसने भारतीय महिलाओं के सम्मान को नई परिभाषा दी है l
जीती इसलिए क्योंकि उसने मातृत्व प्राप्ति के बाद और सेमीफाइनल मुकाबला हारने से पहले लगातार दो कुशतियों में जीत पाई और विघ्न बढ़ाओँ से पार पाते हुए भारतीय महिला पहलवानों और सभी महिला खिलाड़ियों के लिए तमाम रास्ते खोल दिए हैं l पेरिस ओलिंपिक में 100 ग्राम वजन बढ़ जाने पर उसे स्वर्ण पदक की दौड़ से बाहर होना पड़ा था l लाख अनुनय विनय के बावजूद भी उसकी एक नहीं सुनी गई और इस प्रकारण ने उसके लिए लगभग सभी रास्ते बंद कर दिए थे l उसने भारतीय कुश्ती फेडरेशन के दाग़ दार अधिकारियों के विरुद्ध लड़ाई जारी रखी और एक बार फिर से भारतीय न्यायव्यवस्था को गौरवान्वित करते हुए मैट पर उतरने का दम दिखाया l भले ही वह क्वालिफाई नहीं कर आई लेकिन उसने देश के कुश्ती प्रेमियों, और खिलाड़ियों के सामने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसकी चर्चा सालों साल होगी l उसने महिला खिलाड़ियों और युवा पीढ़ी के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी व्याख्या से भारतीय बेटियों को न्याय पाने में मदद मिलेगी l
भले ही विनेश एशियाड का टिकट नहीं कटा पाई लेकिन रिटायर होने और मातृत्व प्राप्ति के बाद वापसी की लड़ाई और कदम कदम पर टांग खींचने वालों से लड़ भिड़ कर उसने जो मान सम्मान पाया है उसके सामने अनेकों ओलम्पिक और एशियाड पदक फीके नज़र आते हैं l जिस व्यवस्था ने सरकार, नेता, सांसदों और कुश्ती के मिट्टी के शेरों के हाथ पाँव बाँध दिए थे, उसे चारों खाने चित मार कर विनेश ने भारतीय न्याय व्यवस्था को बार बार सोचने पर मज़बूर किया और अंततः खुद को निर्दोष साबित करते हुए देश के उच्च और सर्वोच्च न्यायालय का मान भी बढ़ाया है l भले ही वह युवा पहलवान से हार गई लेकिन उसकी लड़ाई देश की वीराँगनाओं में स्थान पा चुकी है l वह कुव्यवस्था के विरुद्ध झाँसी की रानी की तरह लड़ीl उसने हार ना मानने की जिद्द के चलते महिलाओं के सम्मान को सातवें स्थान तक पहुंचा दिया है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
