देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों की नजरें इन दिनों NEET-UG से जुड़े हर अपडेट पर टिकी हुई हैं। परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक के आरोपों और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद छात्रों के बीच पहले ही काफी तनाव का माहौल है। इसी बीच कुछ छात्रों और संगठनों ने मांग उठाई कि जब दोबारा परीक्षा कराई जा रही है तो इसे पुराने तरीके से नहीं, बल्कि कंप्यूटर पर कराया जाना चाहिए। उनका मानना था कि इससे सुरक्षा बेहतर होगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम हो जाएगी।
यह मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस दिशा में कोई हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसका मतलब यह है कि री-एग्जाम उसी प्रारूप में होगा जिसकी तैयारी छात्र पहले से कर रहे हैं।
छात्रों की सोच अलग-अलग
इस पूरे मुद्दे पर छात्रों की राय भी एक जैसी नहीं है। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा कंप्यूटर आधारित होती है तो प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बन सकती है। वहीं कई छात्रों को लगता है कि परीक्षा से कुछ ही समय पहले फॉर्मेट बदलना उनके लिए नई परेशानी खड़ी कर देता।
कई ऐसे छात्र भी हैं जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आते हैं। उनके लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा का अनुभव उतना सामान्य नहीं है जितना बड़े शहरों के छात्रों के लिए। ऐसे में अचानक बदलाव कई अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा सकता था।
विवाद का असर अभी भी बाकी है
पेपर लीक विवाद ने केवल परीक्षा को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि लाखों छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी असर डाला है। कई विद्यार्थियों ने महीनों तैयारी की थी और परीक्षा देने के बाद राहत महसूस की थी। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
यही वजह है कि अब अधिकांश छात्र किसी नए विवाद या बदलाव की बजाय सिर्फ यह चाहते हैं कि परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो जाए।
क्या भविष्य में बदल सकता है सिस्टम?
हालांकि इस बार परीक्षा का तरीका नहीं बदलेगा, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि क्या भविष्य में NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं को पूरी तरह डिजिटल किया जाना चाहिए। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आने वाले वर्षों में इस दिशा में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल छात्रों का फोकस सिर्फ परीक्षा पर
अदालत के फैसले के बाद कम से कम एक बात साफ हो गई है—अब छात्रों को परीक्षा के पैटर्न को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। जो फॉर्मेट पहले तय था, उसी में परीक्षा होगी। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए सबसे बेहतर यही होगा कि वे बाकी बहसों से दूर रहकर अपनी तैयारी पर ध्यान दें।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा कितना महत्वपूर्ण है। छात्रों को सिर्फ एक चीज चाहिए—ऐसी परीक्षा जिसमें उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन हो और किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न रहे।
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