‘ईरान’ मेरी जान!

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ईरान की खेल उपलब्धियों के बारे में कुछ कहने से पहले आंखों देखे कुछ फुटबॉल मुकाबलों का जिक्र करना चाहता हूं। उस दौर में जब भारतीय फुटबॉल अपने स्वर्णिम दौर में थी ईरान के ‘ताज क्लब’ (आज का एस्तेघलाल एफसी) ने भारत के तत्कालीन नंबर एक फुटबॉल टूर्नामेंट ‘डीसीएम’ कप में ऐसा तहलका मचाया, जिसे भारतीय फुटबॉल प्रेमी शायद ही भूल पाए होंगे। भूल भी कैसे सकते हैं, क्योंकि 1969, 70 और 71 के तीन संस्करणों में जीत की हैट्रिक जमाने वाले ईरानी क्लब ने देश भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जो जीत लिया था।
ताज क्लब ने अपने विजयी अभियान में भारत के चैंपियन क्लबों मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, सीमा सुरक्षा बल, मफतलाल, मोहम्मडन स्पोर्टिंग, सलगांवकर, डेंपो, पंजाब पुलिस और अन्य को फुटबॉल का ऐसा पाठ पढ़ाया जिसे आज तक अंबेडकर स्टेडियम में मैच देखने वाले फुटबॉल प्रेमी शायद ही भूल पाए होंगे। बेशक, ईरानी खिलाड़ियों के खेल के भारतीय फुटबॉल प्रेमी कायल हुए लेकिन आकर्षण का बड़ा केंद्र ईरान के लगभग सौ सपोर्टर थे, जो कि दस हजार भारतीय फुटबॉल प्रेमियों पर भारी पड़े। खिलाड़ियों की पत्नियां गोद के बच्चों को लिए ‘ईरान-ईरान’, ‘ईरान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाकर अपनी टीम का मनोबल बढ़ा रही थीं। उनके उत्साह और देश प्रेम की झलक सहजता से महसूस की जा सकती थी।

वही ईरान आज अपने नागरिकों, देश प्रेमियों और एकजुटता के दम पर पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बनकर सामने खड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप की हेंकड़ी निकालकर, सैकड़ों बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गो की कुर्बानी देकर उसने अपनी अलग पहचान बना ली है। ‘ईरान मेरी जान’ का उद्घोष पूरी दुनिया में छा गया है। अमेरिका, इस्राइल और अन्य दुश्मनों को उसने अपनी देशभक्ति और खेल भावना से बहुत बौना साबित कर दिया है। इसी भावना से ईरान ने खेल जगत को भी हैरान परेशान किया है।

जहां तक ओलम्पिक खेलों की बात है तो उसके खाते में 24 गोल्ड, 29 सिल्वर और 32 ब्रॉन्ज हैं। उसके पहलवानों का लोहा दुनिया मानती है। दमखम वाले खेलों वेटलिफ्टिंग और ताइक्वांडो में ईरान बड़ा नाम है तो फुटबॉल और वॉलीबॉल में भी ईरान लगातार आगे बढ़ रहा है। लेकिन अमेरिका और इस्राइल को टक्कर देने वाले ईरान की कामयाबी का रहस्य अब समझ आया है। नौ करोड़ की आबादी वाला देश दुनिया का सुपर हीरो बनकर तनकर खड़ा है। लेकिन डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाला अपना देश कहां है? उसे ईरान से देशभक्ति का पाठ जरूर सीखना चाहिए !

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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