भारत खेल मैदान पर अपनी चौधराहट ज़माने के लिए अनेकों नेक प्रयास कर रहा है l सरकार और खेल मंत्रालय ओलम्पिक जैसे आयोजन कर देश का झंडा बुलंद करने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन मुसीबत है कि पीछा ही नहीं छोड़ रही l फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की नशाखोरी के रूप में मुंह बाएं खड़ी है l हाल ही में इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (आईटीए ) के निदेशक जनरल बेंजामिन कोहेन ने अंतरष्ट्रीय ओलंपिक समिति को एक रिपोर्ट भेजी है जिसे भारतीय खेलों के लिए खतरे की घंटी बताया जा रहा है l रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारतीय खिलाड़ी सैम्पल देने से कतराते हैं और वाडा – नाडा को गच्चा देने के प्रयास करते हैं l
बेंजमीन ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय खिलाड़ियों को धोखेबाज और नशाखोर करार दिया है l हालांकि उन्हें अग्रिम सूचना दी जाती है लेकिन खिलाड़ी जांच से बचने के लिए भाग जाते हैं l तारीफ़ की बात यह है कि भारत 2030में कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी करने जा रहा है और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए आतुर है l ऐसे में जबकि भारत को खेल जगत में नंबर एक नशाखोर देश का तमगा मिल चुका है बड़े आयोजनों की मेजबानी मिल पाना आसान नहीं होगा, ऐसा आईटीए चीफ का मानना है l
उल्लेखनीय है की पिछले तीन सालों से भारत वाडा की डोपिंग का उल्लंघन करने वाले देशों में पहले नंबर पर है और डोप लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है l
बेशक़ मामला गंभीर है और देश की साख गिरने के साथ साथ भविष्य के बड़े आयोजनों केलिए भी नकारात्मक माहौल बन रहा है l बेंजमीन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि प्रतिबंधित दवाओं के सेवन को रोकने में भारतीय खेलों के कर्णधार पूरी तरह नाकारा साबित हुए हैं l सम्भवतया गंभीरता की कमी के कारण ऐसा हो रहा है l.साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि तुरंत प्रयास नहीं किए गए तो भारतीय खेल प्रतिष्ठा को बड़ा आघात सहना पड़ सकता है l यह आघात अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध, आर्थिक दंड या बड़े खेल आयोजनों पर रोक हो सकती है l वाडा और अब आईटीए की रिपोर्ट से साफ हो गया है कि खेल जगत में भारत कि छवि लगातार बिगड़ रही है जिसके परिणाम खिलाड़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
