क्रिकेट प्रेमी 2008 के शुरुआती आईपीएल में श्रीसंत के गाल पर पड़े हरभजन सिंह के ‘बैक हैंड’ थप्पड़ को शायद ही भूल पाए होंगे। यदि कुछ एक को याद नहीं हो तो हाल की राजनीतिक उठापठक के बाद उनके दिल दिमाग में हरभजन-श्रीसंत प्रकरण फिर से आईने में जरूर उभर आया होगा। फिर से याद दिलाते हैं। मुंबई इंडियंस के हरभजन और पंजाब किंग्स के श्रीसंत के बीच कहासुनी होती है और हरभजन सिंह गुस्से में श्रीसंत को थप्पड़ मार देते हैं। नतीजन हरभजन को पूरे सीजन के लिए बैन कर दिया जाता है और मैच फीस भी गंवानी पड़ी थी। हालांकि दोनों खिलाड़ियों ने अनेकों बार अपने सौहार्दपूर्ण रिश्तों की बात कही लेकिन हाल के प्रकरण से साफ हो गया है कि हरभजन सिंह गुस्से में या लोभ-लालच में कभी भी कोई भी निर्णय ले सकते हैं।
आप पार्टी के छह अन्य राज्य सभा सदस्यों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के हरभजन के कदम की चौतरफा निंदा हो रही है। हालांकि यह उनका निजी मामला है और हर इंसान अपनी बेहतरी के लिए कभी भी, कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन हरभजन सिंह उस खेल के जाने-माने खिलाड़ियों में शामिल हैं, जोकि देश का सबसे लोकप्रिय खेल है। उस खेल से है, जिसने देश के बाकी खेलों को नरक के द्वार तक पहुंचा दिया है।
राघव चड्ढा ने एक अच्छे संस्कारी, ईमानदार, और पार्टी के वफादार सदस्य की छवि को दागदार बना दिया है। लेकिन हरभजन के आचरण की देश भर की क्रिकेट में निंदा हो रही है। उसके पुतले फूंके जा रहे हैं, जूते मारे जा रहे हैं। इसलिए क्योंकि अन्य छह दल-बदलुओं के मुकाबले भज्जी का कद ऊंचा है। राघव चड्ढा की हर तरफ थू-थू हो रही है क्योंकि उसने अपने पिछले बयानों के झूठ को खुद चिंगारी दी है। लेकिन जो हरभजन अपनी फिरकी से अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों को गलत स्ट्रोक खेलने के लिए विवश करता था, वह चड्ढा के जाल में क्यों फंस गया? भारतीय क्रिकेट प्रेमी पूछते हैं, क्यों उसने एक बार फिर श्रीसंत के गाल पर पड़े थप्पड़ की याद ताजा कर दी है?
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
