अफगानिस्तान की एक जांबाज बेटी ने वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना भी आज के दौर में वहां की बंदिशों में रहने वाली लड़कियों के लिए मुमकिन नहीं लगती। 31 वर्षीय पर्वतारोही ज़किया अहमद जिन्हें अब ‘रिवर’ नाम से भी जाना जाता है ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। वह एवरेस्ट फतह करने वाली अफगानिस्तान की पहली महिला बन गई हैं। ज़किया की यह कामयाबी सिर्फ एक खेल या एडवेंचर का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह तालिबान के दमनकारी शासन के खिलाफ एक बुलंद आवाज और महिला स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरी है।
तालिबानी हमले में बची जान और वतन छोड़ने का दर्द
ज़किया का बचपन अफगानिस्तान के गजनी प्रांत के जघोरी जिले में बीता जो कि हजारा बहुल इलाका है। किशोरावस्था में ही उन्होंने तालिबान की क्रूरता को बेहद करीब से देखा था। एक बार जब वह बस से काबुल जा रही थीं तब उनकी बस पर तालिबानियों ने जानलेवा हमला कर दिया था। उस हमले में ज़किया बाल-बाल बची थीं लेकिन उस भयानक खौफ ने उनके दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ा।
साल 2021 में जब अफगानिस्तान की सत्ता पर दोबारा तालिबान का कब्जा हुआ तो महिलाओं की शिक्षा, खेल और आजादी पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। अपने भाई को खोने और लगातार मिल रही धमकियों के बाद ज़किया को अपना वतन छोड़ना पड़ा। वह शरणार्थी (रिफ्यूजी) बनकर ऑस्ट्रेलिया चली गईं। नए देश में जाकर उन्होंने अपना पुराना दर्द पीछे छोड़ने के लिए अपना नाम बदलकर ‘रिवर’ रख लिया क्योंकि उनका मानना है कि एक नदी की तरह उन्हें भी बिना रुके बस आगे बढ़ते जाना है।
अफ़गान लड़कियों की शिक्षा और आज़ादी के लिए समर्पित चढ़ाई
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की छात्रा ज़किया ने वहां रहकर अपने पर्वतारोहण के सपने को जिंदा रखा। एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले उन्होंने फ्रांस के मोंट ब्लांक भारत के नंदा देवी और खुद अफगानिस्तान की सबसे ऊंची चोटी नौशाख (7,402 मीटर) पर चढ़ाई करके अपनी काबिलियत साबित की थी।
एवरेस्ट मिशन के लिए उन्होंने क्राउडफंडिंग के जरिए पैसे जुटाए और नेपाल में दो महीने की कड़ी ट्रेनिंग ली। जब भी पहाड़ों पर चढ़ते हुए उनकी सांसें फूलती थीं तो वह अफगानिस्तान की उन बंद कमरों में कैद लड़कियों के बारे में सोचती थीं जिन्हें पढ़ने तक की आजादी नहीं है। ट्रेनिंग के दौरान मेरा पीक पर चढ़ने के बाद उन्होंने एक कागज पर संदेश लिखा था जिस पर लिखा था दुनिया भर में महिलाओं की आजादी शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए चढ़ाई।
शिखर से गूंजी आवाज: परिस्थितियां कैसी भी हों, रुकना मत
21 मई 2026 की सुबह नेपाली गाइड दावा तेनजिंग शेर्पा और फुरबा ग्यालजेन शेर्पा के साथ ज़किया ने एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखा। चोटी पर पहुंचते ही जब उन्होंने सैटेलाइट फोन से बेस कैंप में बात की, तो खुशी से चिल्लाते हुए कहा प्लीज, मेरी मां को फोन लगाओ।
अपनी इस ऐतिहासिक जीत के बाद ज़किया ने अफगानिस्तान में तालिबान के साए में जी रही लड़कियों के लिए एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक संदेश भेजा। उन्होंने कहा किसी भी परिस्थिति में खुद को कभी मत रोकना। हर किसी के भीतर क्षमताएं होती हैं और अपनी मेहनत और पक्के इरादे से आप अपने हर सपने को सच कर सकते हैं। ज़किया की यह कामयाबी आज दुनिया भर के रिफ्यूजियों और अपनी आजादी के लिए लड़ रही महिलाओं के लिए हिम्मत की एक नई मिसाल बन गई है।
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