आरोपों और भीतराघात से घिरे भारतीय कुश्ती संघ ने उम्र की धोखाधड़ी से निपटने के लिए देशव्यापी अभियान की शुरूआत की है l अंडर 17 राष्ट्रीय ओपन रैकिंग टूर्नामेंट में भाग लेने का आवेदन करने वाले 1200 में से 500 पहलवानों को इसलिए बाहर का. रास्ता दिखा दिया गया है क्योंकि उन्होंने गलत आयु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे l डब्लू एफ लाई के इस कदम को लेकर उसकी सदस्य इकाइयों में भले ही नाराजगी और आक्रोश है लेकिन ऐसे सख्त कदम उठाने की जरुरत है वरना असली प्रतिभाएं दब कर रह जाएंगी l आखिर कब तक चार छह साल बड़े और धोखोधड़ी पर टिके पहलवान कुश्ती को डुबोते रहेंगे!
लेकिन सिर्फ कुश्ती में ही उम्र की धोखाधड़ी नहीं चल रहीl फुटबाल, हॉकी, तैराकी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक, बास्केट बॉल, जूडो, कराटे, तायक्वाडो, मुक्केबाजी क्रिकेट और तमाम खेलों में एज फ्रॉड का जंगलराज चल रहा है l लेकिन ज्यादातर खेल संघ खेल मंत्रालय की भी परवाह नहीं करते l उन्हें अपनी कुर्सी बचानी है बाकी देश के खेल जाएं भाड़ में l
कुश्ती फेडरेशन की तरह ही एक बड़ा साहसिक कदम सुब्रतो मुकर्जी फुटबाल टूर्नामेंट सोसाइटी ने भी उठाया था l जूनियर टूर्नामेंट के तीन चौथाई स्कूल एज फ्रॉड में फंसे और लगभग तीन सौ खिलाड़ियों को और तीन चौथाई टीमों को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था l बास्केट बाल और एथलेटिक में यह जंगलराज सालों से चल रहा है लेकिन ठोस कदम नहीं उठाने की कीमत चुकानी पड़ रही है l क्योंकि दोषियों को एक्सपोज नहीं किया जाता, दंड नहीं दिया जाता इसलिए आंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में हमारे खिलाड़ी बड़ी चुनौती पेश नहीं कर पाते l कुछ पूर्व चैंपियनों और खेल जानकारों के अनुसार उम्र की धोखाधड़ी करने वाले, उम्र घटा कर लाभ कमाने वाले खिलाड़ी ही आगे चल कर डोप के शिकार बनते हैं l स्कूल स्तर पर भ्रष्ट कोच, अकादमियों के आका और खेल को खिलवाड़ समझने वालों की शह पर पलने और पनपने वाले खिलाड़ी ही भारतीय खेलों की सबसे कमजोर कड़ी कहे जा सकते हैं l शुरुआत उम्र की धोखाधडी से होती है और इसके साथ ही खिलाड़ी और खेल आकाओं का चारीत्रिक पतन देश पर और देश के खेलों पर भारी पड़ जाता है l ऐसे में कुश्ती फेडरेशन के कदम की सराहना की जानी चाहिएl बेहतर होगा अन्य खेल भी कुश्ती फेड का अनुसरण करें l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
