मुस्लिम फुटबॉलर अब विलुप्त प्रजाति!

muslim footballer

भारतीय फुटबॉल आज कहां खड़ी है, बताने की जरूरत नहीं है। हम, आप और सभी जानते हैं कि देश की फुटबॉल की ऐसी दुर्दशा पहले कभी नहीं रही। कारण कई हैं। मसलन गंदी राजनीति, गुटबाजी, भ्रष्टाचार, उम्र की धोखाधड़ी और खिलाड़ियों के चयन में धांधली। लेकिन यदि कहा जाए कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मुस्लिम खिलाड़ियों की लगातार घटती संख्या भी एक बड़ा कारण है तो बहुत से लोगों को यह तर्क मंजूर नहीं होगा। लेकिन ऐसा हो रहा है। कारण कुछ भी हो लेकिन मुस्लिम फुटबॉलर लगातार घट रहे हैं।

यह न भूलें कि 1951 और 1962 के एशियाड में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम के कोच सैयद अब्दुल रहीम थे जो कि भारत का सर्वकालीन श्रेष्ठ प्रदर्शन है। अहमद खान और यूसुफ खान क्रमश: एशियाड इलेवन में शामिल थे। सही मायने में वह दौर भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम दौर था ।

बाद के सालों में मुस्लिम खिलाड़ियों का जौहर कोलकाता के क्लबों मोहन बागान, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन स्पोर्टिंग और अन्य क्लबों में देखने को मिला। इधर, दिल्ली के नामी क्लबों यंगमैन, सिटी, नेशनल, मुगल्स, मूनलाइट, स्टूडेंट्स, अजमल, शास्त्री, कॉलेजियंस, अहबाब आदि में भी कई मुस्लिम खिलाड़ियों के जलवे देखते ही बनते थे । पिछले पांच छह दशकों में दिल्ली, कोलकाता और देश की फुटबॉल में अलग पहचान बनाने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में मोहम्मद हबीब, अकबर, नईमुद्दीन, शाबिर अली, सुजात अशरफ और दर्जनों अन्य ने बड़ा योगदान दिया लेकिन अब मुस्लिम खिलाड़ी जैसे लुप्त हो रहे हैं। यही हाल देश की राजधानी की फुटबॉल का भी है।

सुजात अशरफ, उनके पुत्र आफताब, मंजूर अहमद, शरीफुद्दीन घोषी , अबरार, लियाकत अली, सलीम, मोहम्मद असलम, रिजवान , कामिल, अतीक, शफीक, सुल्तान और कई अन्य मुस्लिम खिलाड़ियों ने राजधानी की फुटबॉल को गौरवान्वित किया। लेकिन यह संख्या अब जीरो के आस पास पहुंच गई है। डीएफए और बाद में डीएसए के प्रमुख पदाधिकारियों में नवाबुद्दीन कुरैशी, बुंदू मियां, नासिर अली, अजीज, कुदूश हनीफ और अन्य की भूमिका सराहनीय रही। लेकिन आज आलम यह है कि मुस्लिम क्लबों की हालत खस्ता है। खिलाड़ी और अधिकारी खोजे नहीं मिल पाते हैं। इसलिए क्योंकि पुरानी दिल्ली के फुटबॉल मैदान तरक्की के चलते लुप्त हो गए हैं। दरियागंज, दिल्ली गेट, मुगल्स ग्राउंड, रामलीला मैदान के आस-पास और चारों तरफ फुटबॉल जैसे प्रतिबंधित हो गई है।

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
Share:

Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *