‘जो खेलेगा वो खिलेगा”! लेकिन क्या गारंटी?

Sports News 2

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त के बाद एक बार फिर भारतीय खेलों और खिलाडियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, l साथ ही उन्होंने देश के युवाओं को कोई ना कोई खेल खेलने और खेल उपलब्धियों से देश , समाज और अपने माता पिता को गौरवान्वित करने का आह्वान भी किया l भले ही वह युवाओं को अक्सर सम्बोधित करते रहे हैँ लेकिन जब से भारत को राष्टमण्डल खेल 2030 अलाट हुए हैँ और जब से भारत ने 2036 के ओलिंपिक खेलों के आयोजन को लेकर उत्सुकता दिखाई है तब से प्रधानमंत्री खेलों के साथ साथ युवाओं के साथ नजदीकियां बढ़ाते नज़र आ रहे हैँ l शायद युवा पीढ़ी का बढ़ता आंकड़ा, उनकी समझ और कुछ कर गुजरने की दृढ इच्छा शक्ति को उन्होंने भाँप लिया है l
भले ही उन्हें सालों बाद खेलों की याद आई हो लेकिन ‘ जो खेलेगा वो खिलेगा ‘ का उनका नारा देश के बचपन और युवा पीढ़ी को खेलने के लिए प्रोत्साहित करता है l हो सकता है उनके आह्वान से हजारों लाखों युवा खेल मैदानों में उतर जाएं l लेकिन खेलेंगे कहाँ? यह सिर्फ सवाल नहीं है l जिस देश में एक लाख स्कूल बंद हो रहे हैँ या बदहाल हैँ वहां भला खेलने के मैदान कहाँ मिलेंगे l प्रधान मंत्री जी, यह कटु सत्य है कि देश के समर्पित, गरीब और कुछ कर गुजरने के लिए उत्साहित छात्र खिलाडियों के लिए ना सिर्फ स्कूलों की खंडहर इमरातें हैँ बल्कि खेलने के मैदान भी गायब हैँ l 150 करोड़ की आबादी के लिए जितने खेल मैदान, कोर्ट, तरण ताल, जिम और टर्फ और खेल सामग्री चाहिए उसका एक फीसदी भी देशभर में नहीं हैँ l.नतीजन हॉकी और फुटबाल जैसे लोकप्रिय खेलों में हमारी हालत बद से बदतर हो गई है l शर्मनाक बात यह है कि पिछले ओलम्पिक से हम बिना स्वर्ण पदक के लौटे थे l
पदक तालिका में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए उन्होंने उपेक्षित खेलों को प्रोत्साहन देने की सलाह भी दी है l खेलो इंडिया और टैलेंट हंट जैसे कार्यक्रमों से देश में खेलों के लिए माहौल बनाने की बात कर रहे हैँ l देर से ही सही लेकिन युवा जागरण और खेलों के प्रति माहौल बनाने को उन्होंने तरजीह दी है l लेकिन सिर्फ खेलने का नारा उछालने से बात नहीं बनने वाली l बेहतर होता खेलों में बढ़ती नशाखोरी और उम्र के फ़र्ज़ीवाड़े पर भी कुछ बोलते l लेकिन शायद उनके सलाहकारों को भी यह पता नहीं कि भारतीय खिलाड़ी नशाखोरी और उम्र की धोखाधड़ी में नंबर एक पर हैँ और इन दो बाधाओं ने देश को बार बार शर्मसार किया हैl

‘खेल की बात पीएम मोदी के साथ’, यह कार्यक्रम तो ठीक है लेकिन देश के खेलों और खिलाडियों के लिए इतना सब काफी नहीं है l महिला खिलाडियों के शोषण, खेल संघो के भ्र्ष्टाचार, चयन में धांधली, खिलाडियों का हिस्सा चट करने वालों का षड्यंत्र, साई के भ्र्ष्टाचार, डोप और उम्र की धोखाधड़ी के बारे में शायद पीएम को बताया नहीं गया l देश का जागरूक युवा चाहे तो उनसे इन सब सवालों के जवाब भी मांग सकता है l बेशक़, इन सवालों के जवाब देश के खेल आकाओं के पास भी नहीं हैँ l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
Share:

Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *