यदि फीफा अगले वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 48 से बढा कर 64 कर देता है तो भारत के वर्ल्ड कप खेलने का सपना साकार हो सकता है, ऐसा कुछ तथाकथित एक्सपर्टस कह रहे हैं l लेकिन भारतीय फुटबाल पंडित, मुफ्त की बयानबाजी करने वाले फुटबाल के लुटेरों और खेल का पहला पाठ भी नहीं पढ़े पंडियों को पता नहीं क्यों लगता है कि भारतीय फुटबाल टीम अगले वर्ल्ड कप में भाग ले सकती है?
सवाल यह पैदा होता है कि भाग लेने वाली टीमों की संख्या बढ़ जाने से भारत की कौनसी लाटरी लग जाएगी? जब भाग लेने वाली टीमों की संख्या 32 से 48 की गई थी, यह दावा किया गया था कि भारत के लिए एशिया से टिकट पाने का वक्त आ गया है l लेकिन ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि साल दर साल भारतीय फुटबाल का स्तर गिरता चला गया l फिलहाल भारत फीफा की रैकिंग में 140 वें स्थान के आस पास है l लेकिन एएफसी रैकिंग में 26 वें नंबर पर है l बेशक़ यह भारतीय फुटबॉल के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है l एक समय महाद्वीप का चैंपियन देश गिरते पड़ते इतना गिर चुका है कि ऊपर उठ कर चलना भी भारी पड़ गया है, क्वालिफाई करना तो दूर की बात है l
थोड़ा पीछे चलें तो पिछले तीन चार दशकों में भारतीय फुटबाल 1994 में 94 वीं रैंकिंग पर थी l आगे बढ़ें तो 2015 में 173 वें नंबर पर पिछड़ गए l हालांकि फिलहाल रैकिंग में सुधार हुआ है लेकिन प्रदर्शन गिरावट की हदें पार कर चुका है l इतना गिरा है कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में भाग लेने के दावेदार भी नहीं रहे हैं l प्रदर्शन में गिरावट के कई कारण हैं लेकिन यह सच है कि साधन सुविधाओं की कमी, प्रोत्साहन का अभाव, फेडरेशन का भ्र्ष्टाचार जैसे कारणों ने भारतीय फुटबाल को पनपने नहीं दिया l मूल विषय की तरफ लौटें तो
भाग लेने वाली टीमों की संख्या 32 से 48 और चार साल बाद 64 कर देने के बावज़ूद भी भारत फीफा कप नहीं खेल सकता l इसलिए क्योंकि एशियाई टीमों की संख्या 12 या कुछ ज्यादा करना भी फुटबाल के साथ धोखा होगा सबसे लोकप्रिय और दमदार खेल का अपमान होगा l क्योंकि एशियाई फुटबाल में चार छह देशों को छोड़ कर बाकी बस खाना पूरी कर रहे है, जिनमे हम महांफिसड्डी हैं l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
