केकेआर के बल्लेबाजों ने किया निराश
मैच की शुरुआत से ही ऐसा लगा ही नहीं कि कोलकाता की टीम जीतने के इरादे से मैदान पर उतरी है। मुंबई के तेज गेंदबाजों ने वानखेड़े की पिच का पूरा फायदा उठाया और शुरुआती ओवरों में ही केकेआर के टॉप ऑर्डर की धज्जियां उड़ा दीं। पावरप्ले खत्म होने तक कोलकाता के तीन बड़े खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके थे। दबाव इतना ज्यादा था कि टीम का कोई भी बल्लेबाज खुलकर स्ट्रोक नहीं खेल पाया। मिडिल ऑर्डर ने पारी संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन रनों की रफ्तार इतनी धीमी थी कि स्कोरबोर्ड पर एक बड़ा लक्ष्य टांगना उनके लिए सपना बनकर रह गया।
स्पिनर्स ने बुना जीत का जाल
तेज गेंदबाजों के काम को मुंबई के स्पिन विभाग ने और आसान बना दिया। बीच के ओवरों में जब रनों की जरूरत थी, तब स्पिनर्स ने ऐसी कसी हुई गेंदबाजी की कि केकेआर के बल्लेबाज बाउंड्री लगाने के लिए तरस गए। डॉट बॉल्स के दबाव में कोलकाता ने लगातार अंतराल पर विकेट गंवाए। पूरी पारी में केकेआर की कोई भी बड़ी साझेदारी नहीं पनप पाई, जिसका नतीजा यह हुआ कि टीम एक बेहद मामूली स्कोर पर सिमट गई।
मुंबई की बेखौफ बल्लेबाजी
इतने छोटे लक्ष्य का पीछा करना मुंबई जैसी फॉर्म में चल रही टीम के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं थी। सलामी बल्लेबाजों ने आते ही केकेआर के गेंदबाजों पर धावा बोल दिया। हालांकि, बीच में एकाध विकेट गिरने से थोड़ा उत्साह जरूर दिखा, लेकिन क्रीज पर मौजूद बल्लेबाजों ने बिना किसी हड़बड़ाहट के मैच को अंत तक पहुँचाया। मैदान के हर कोने में लगे चौकों और छक्कों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और मुंबई ने 6 विकेट रहते ही यह मुकाबला आसानी से अपनी झोली में डाल लिया।
कोलकाता के लिए बढ़ी मुश्किलें
इस करारी हार ने कोलकाता नाइट राइडर्स के मैनेजमेंट के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। उनकी बल्लेबाजी में गहराई की कमी और गेंदबाजी में अनुशासन का न होना साफ़ नजर आया। वहीं दूसरी ओर, इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि मुंबई को उनके घर में हराना फिलहाल नामुमकिन सा है। इस बेहतरीन प्रदर्शन के साथ मुंबई ने अंक तालिका में अपनी जगह और मजबूत कर ली है, जबकि केकेआर को अपनी गलतियों से सबक लेकर अगले मैच में उतरना होगा।
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