नीदरलैंड और बेल्ज़िम की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप में किसी भी भारतीय को अंपायरिंग और टेक्निकल समिति की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, जिसे लेकर भारतीय हॉकी में बेचैनी व्याप्त है l देश के हॉकी आका हैरान परेशान हैं और यह जानने समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर भारतीय हॉकी से कहाँ गलती हुई है l हॉकी जानकार और विशेषज्ञ अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन से पूछ रहे हैं कि क्यों उस देश की हॉकी की अनदेखी की जा रही है जिसने सालों साल विश्व हॉकी में अपना परचम फहराया था l
एक भी भारतीय अंपायर को वर्ल्ड कप मैचों का दाइत्व नहीं सौपे जाने का सीधा सा मतलब है कि भारत और पाकिस्तान की हॉकी के पतन के बाद हॉकी प्रशासन और व्यवस्था पूरी तरह यूरोपीय देशों की पकड़ में आ गई है l आठ बार के ओलिंपिक चैंपियन और एक बार के विश्व विजेता भारत और दमदार रिकॉर्ड रखने वाले पाकिस्तान की अब कोई पूछ नहीं रही l हालांकि एस्ट्रो टर्फ मैदानों के अस्तित्व में आने के बाद से यूरोप के देशों ने हॉकी का सर्वस्व कब्ज़ा लिया लेकिन अंपायरों और तकनीकी समिति में किसी भी भारतीय का नहीं होना सबसे बड़ा आघात कहा जा सकता है l अर्थात अब एशियाई हॉकी की कहीं कोई सुनवाई नहीं रही l बेशक़ इस दयनीय स्थिति के सबसे बड़े जिम्मेदार हम खुद हैं l
इस शर्मनाक स्थिति के बारे में जब कुछ पूर्व खिलाड़ियों और हॉकी विशेषगयो से पूछा गया तो अधिकांश ने भारतीय हॉकी के पहचान गँवाने को सबसे बड़ा कारण बताया l उन्हें लगता है कि हॉकी इंडिया का ढुलमुल रवैयाऔर शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों का दुराचरण विवाद का कारण है l अध्यक्ष दिलीप टिर्की और सचिव पहलवान भोला नाथ का शीर्ष पदों पर होने का सीधा सा मतलब है कि भारत और पाकिस्तान की हॉकी के पतन के बाद हॉकी प्रशासन और व्यवस्था पूरी तरह यूरोपीय देशों की पकड़ में आ गई है l आठ बार के ओलिंपिक चैंपियन और एक बार के विश्व विजेता भारत और दमदार रिकॉर्ड रखने वाले पाकिस्तान की अब कोई पूछ नहीं रही l एस्ट्रो टर्फ मैदानों के अस्तित्व में आने के बाद से यूरोप के देशों ने हॉकी का सर्वस्व कब्ज़ा लिया लेकिन अंपायरों और तकनीकी समिति में किसी भी भारतीय का नहीं होना बड़ा अशुभ संकेत कहा जा सकता है l होसकता है भविष्य में भारत और पाकिस्तान को पदक के दावेदारों से बाहर कर दिया जाए l अर्थात अब एशियाई हॉकी की कहीं कोई सुनवाई नहीं रही l बेशक़ इस दयनीय स्थिति के सबसे बड़े जिम्मेदार हम खुद हैं l इसलिए क्योंकि हमने अपने तथाकथित राष्ट्रीय खेल की गरिमा को बना कर नहीं रखा l आज आलम यह है कि हम आठवें- नौवें नबर के देश बन बन गए है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
