अत्यधिक आत्मविश्वास से बचे तो!

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“वो मुझसे कहते थे कि 100 मीटर भारतियों के लिए नहीं बना है l जाएं और 400 मीटर में प्रयास करें l लेकिन मैंने कर दिखाया l भारत का सबसे तेज दौड़ने वाला इंसान बन गया हूँ l लेकिन यह तो अभी शुरुआत हैl आगे देखिए क्या होता है “,

पंजाब के गुरिंदर वीर सिंह ने नेशनल सीनियर फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर फर्राटा दौड़ 10.09 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय में जीतकर एशियाड और कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने और भारतीय कीर्तिमान को बेहतर करने की उम्मीद जतलाई है। 25 वर्षीय चैंपियन के पास अभी उम्र और जोश के साथ कुछ और बड़े मुकाम पाने का अवसर है। जहां तक कुल भारतीय प्रदर्शन की बात है तो दूसरे स्थान पर रहे अनिमेष कुजूर उसके साथ लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और 10.18 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन कब कोई भारतीय ओलम्पिक और विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतेगा? यह सवाल सालों से जस का तस खड़ा है। ठीक उसी प्रकार जैसे मिल्खा सिंह और पीटी उषा पदक के एकदम करीब पहुंचने के बाद चूक गए थे। लेकिन गुरिंदर कहता है कि उसके तरकश में कुछ और तीर हैं जिनके दम पर वह ना सिर्फ ओलंपिक पदक जीत सकता है, सर्वकालीन श्रेष्ठ भी बन सकता है l लेकिन यह उसका अत्यधिक आत्मविश्वास कहा जा रहा है l

जहां तक 100 मीटर के रिकॉर्ड की बात है तो जमैका के उसैन बोल्ट क्रमश: 9.58 सेकंड और 9.63 सेकंड के अभूतपूर्व प्रदर्शन के साथ विश्व और ओलम्पिक रिकॉर्ड को बनाए और बचाए हुए हैं। पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक सालों से कोई भी पुरुष फर्राटा धावक उसैन बोल्ट के आस-पास नहीं पहुंच पाया है। जहां तक महिलाओं की बात है तो उन्हें ओलम्पिक पदक जीतने के लिए अभी सालों का इंतजार करना पड़ सकता है।उसैन बोल्ट ने 100 मीटर में लगातार तीन गोल्ड जीत कर खुद को इतिहास का सर्वश्रेष्ठ और सबसे तेज धावक साबित किया था। रही भारत की बात है तो नीरज चोपड़ा ऐसे एथलीट हैं, जिसने इकलौता ओलम्पिक गोल्ड जीता है। लेकिन ट्रैक स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों के लिए पहला ओलम्पिक या विश्व स्तरीय पदक जीतना आसान नहीं होगा । अमेरिका, जमैका, केन्या और कुछ अन्य देश ट्रैक पर कोहराम मचाये हुए हैं। इधर गुरिंदर कहता है कि उसका श्रेष्ठ आना अभी बाकी हैl बेशक़, गुरिंदर के हौसले बुलंद हैं। भारतीय मीडिया को उसके रूप में बड़ा मसाला मिल गया है l वही मीडिया उसे सातवें आसमान में बिठा रहा है l जरूरत इस बात की है की है कि वह अति उत्साह से बचे, एक-एक कदम बेहद भारी साबित हो सकता है l खासकर हवा में चढ़ाने वाले और धड़ाम से गिराने वाले नाकारा मीडिया से बच कर रहे। हो सके तो नीरज चोपड़ा की शरण में जाए और शालीनता के साथ आगे बढ़ने के गुर सीखें। मीडिया के पागलपन से बच कर रहा तो
वह देश के लिए ऐसा कुछ कर सकता है जो आज तक कोई भी नहीं कर पाया है l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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