स्मार्टफोन और रील्स की दुनिया में खोए बच्चों को लेकर परेशान रहने वाले माता-पिता के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा ने संसद में ‘शील्ड बिल’ नाम से एक नया प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। इस बिल का सीधा मकसद 18 साल से कम उम्र के बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के बुरे प्रभावों, साइबर बुलिंग और अश्लील कंटेंट से सुरक्षित रखना है।
इस नए प्रस्ताव के लागू होने पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। 13 साल से कम उम्र के बच्चे अब अपने माता-पिता की आधिकारिक मंजूरी के बिना इंस्टाग्राम, यूट्यूब या फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नया अकाउंट नहीं बना पाएंगे। इसके साथ ही टेक कंपनियों को माता-पिता के लिए एक ऐसा सिस्टम देना होगा, जिससे वे अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रख सकें और यह तय कर सकें कि उनका बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है।
इस बिल में बच्चों के डेटा को ट्रैक करके उन्हें विज्ञापन दिखाने पर भी पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है। अगर कोई सोशल मीडिया कंपनी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इन नियमों को तोड़ने की गलती करती है, तो उस पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना ठोका जा सकता है और बात न मानने पर उस ऐप को भारत में बैन तक किया जा सकता है।
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे कई बड़े देश पहले ही बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए सख्त कानून ला चुके हैं। भारत में भी लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन देने की एक सीमा तय हो। अगर यह बिल कानून बनता है, तो यह देश के करोड़ों बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
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