नई दिल्ली। दिल्ली में DTC बसों की हड़ताल ने शुक्रवार को तीसरे दिन भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं होने दीं। हजारों ड्राइवरों के हड़ताल पर रहने की वजह से राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। रोजाना बस से सफर करने वाले लोगों को अब मेट्रो, ऑटो और कैब जैसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 हजार से ज्यादा ड्राइवर हड़ताल में शामिल हैं। इसका असर DTC की बस सेवा पर साफ दिखाई दे रहा है। करीब 6,840 DTC बसों में से लगभग 80 फीसदी बसें सड़कों पर नहीं चल रही हैं। ऐसे में रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सबसे ज्यादा दिक्कत उन यात्रियों को हो रही है जो रोज ऑफिस, कॉलेज या दूसरे जरूरी कामों के लिए बस पर निर्भर रहते हैं। बसों की कमी के कारण कई लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करके कैब या ऑटो लेना पड़ रहा है, जबकि कुछ यात्री मेट्रो का रुख कर रहे हैं।
DTC कर्मचारियों की ओर से वेतन और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़ी कई मांगें उठाई जा रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं पर लंबे समय से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। वहीं, हड़ताल लंबी खिंचने से आम यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में DTC की अहम भूमिका है। खासकर उन यात्रियों के लिए जो कम खर्च में शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचना चाहते हैं। ऐसे में बस सेवा बाधित होने से रोजमर्रा की आवाजाही का पूरा गणित बिगड़ गया है।
फिलहाल यात्रियों की नजर इस बात पर है कि कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। जब तक बसें सामान्य तरीके से सड़कों पर नहीं लौटतीं, दिल्ली वालों को सफर की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय और वैकल्पिक परिवहन का ध्यान रखना पड़ेगा।
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