यमन के हूती विद्रोहियों के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष और पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में गहराते संकट के बीच एक ऐतिहासिक सैन्य समझौता हुआ है। अमेरिका ने सऊदी अरब को अपने सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक 5वीं पीढ़ी के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचने की अंतिम मंजूरी दे दी है। लगभग 24.3 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये) की यह महाडील न केवल अमेरिका और सऊदी अरब के रणनीतिक संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाएगी, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के रक्षा परिदृश्य को भी पूरी तरह से बदलकर रख देगी।
क्या है 24.3 अरब डॉलर की इस महाडील में खास?
इस विशाल रक्षा सौदे के तहत अमेरिका, सऊदी अरब की वायुसेना को कई बेड़ों में F-35 ‘लाइटनिंग II’ लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही इस सौदे में विमानों के रख-रखाव, उन्नत मिसाइल सिस्टम, रडार तकनीक, पायलटों का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और स्पेयर पार्ट्स का एक पूरा पैकेज शामिल है।
F-35 लड़ाकू विमान अपनी असाधारण ‘स्टील्थ’ तकनीक के लिए जाने जाते हैं। इस तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के सबसे आधुनिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर उनके ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होता है। अब तक मध्य पूर्व के क्षेत्र में केवल इजराइल ही एकमात्र ऐसा देश था जिसके पास अमेरिकी F-35 विमान मौजूद थे।
हूती संकट और क्षेत्रीय सुरक्षा बनी मुख्य वजह
हाल के दिनों में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सीमावर्ती इलाकों, बुनियादी ढांचों, जहाजरानी मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाकर कई मिसाइल व आत्मघाती ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणालियों ने इनमें से कई हमलों को समय रहते विफल किया है, लेकिन हूतियों के इस बढ़ते दुस्साहस ने रियाद को अपनी हवाई सुरक्षा और हमलावर क्षमता को कई गुना मजबूत करने पर मजबूर कर दिया है।
F-35 जैसे मारक विमानों के सऊदी बेड़े में शामिल होने से सऊदी वायुसेना को दुश्मन की सीमाओं के भीतर गहराई तक घुसकर सटीक हमले करने की असीम ताकत मिल जाएगी।
खाड़ी क्षेत्र के शक्ति संतुलन पर प्रभाव
इस सौदे को केवल एक सैन्य खरीद के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े कूटनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। वॉशिंगटन और रियाद के बीच हुआ यह समझौता यह साफ संदेश देता है कि अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। इस महाडील के बाद मध्य पूर्व में ईरान और उसके समर्थित गुटों के खिलाफ सऊदी अरब का पलड़ा और भी ज्यादा भारी होना तय माना जा रहा है।
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