रील की दुनिया का नशा और शॉर्टकट का जाल: प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं को साफ़ संदेश

PM Modi 7

आज की नई पीढ़ी यानी Gen-Z की एक बड़ी सच्चाई यह है कि उनकी सुबह रील्स से शुरू होती है और रात शॉर्ट्स पर ख़त्म। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की चमचमाती जिंदगी देखकर हर कोई रातों-रात मशहूर और कामयाब होना चाहता है। इसी भटकाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को एक बहुत बड़ी और गहरी बात समझाई है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की किताब के विमोचन पर बोलते हुए पीएम ने साफ़ कहा कि स्क्रीन के इस छोटे से डिब्बे में दिखने वाली दुनिया असल जिंदगी से बहुत अलग होती है, इसलिए युवाओं को शॉर्टकट के चक्कर में पड़ने से बचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने रेलवे स्टेशन पर लिखी रहने वाली एक आम सी चेतावनी का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब इंसान ज़िंदगी में बिना मेहनत किए जल्दी आगे बढ़ने की सोचता है, तो वही “शॉर्टकट उसको शॉर्ट कर देता है।” 15 या 30 सेकंड की रील में किसी की कामयाबी तो दिख सकती है, लेकिन उसके पीछे बरसों की हाड़-तोड़ मेहनत और संघर्ष कभी नहीं दिखता। आजकल के युवा दूसरों की रील देखकर अपनी जिंदगी की तुलना करने लगते हैं, जिससे वे अंदर ही अंदर डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो रहे हैं।

इन्फ्लुएंसर्स के असर से हटकर असल दुनिया को समझने की सलाह देते हुए पीएम ने युवाओं को फिर से किताबें पढ़ने और आत्मकथाएं टटोलने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि स्क्रीन स्क्रॉल करने से इंसान को सिर्फ पल भर का मनोरंजन मिलता है, लेकिन किसी संघर्षशील इंसान की किताब पढ़ने से जिंदगी जीने का नज़रिया और समझ मिलती है।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटे से गाँव से निकलकर देश के सबसे बड़े पद तक पहुँचने का सफ़र तय किया जाता है। उसमें कोई सोशल मीडिया का शॉर्टकट नहीं था, बल्कि दशकों की तपस्या और ईमानदारी थी। पीएम का यह सीधा और देसी संदेश आज के उन सभी युवाओं के लिए आँखें खोलने वाला है, जो इंटरनेट की आभासी दुनिया को ही अपनी असली पहचान मान बैठे हैं।

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