बंगाल के चुनावी समर में राम और काली का उद्घोष: पीएम मोदी की बड़ी अपील

Bangal election

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के बाद सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल के चुनावी मैदान में उतरकर न केवल ममता बनर्जी सरकार पर सीधा हमला बोला है, बल्कि अपनी अपील में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को भी केंद्र में रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए भगवान राम और मां काली का आह्वान किया, जिसे भाजपा के कोर एजेंडे और बंगाली अस्मिता को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मोदी ने कहा कि बंगाल की धरती शक्ति की साधना की धरती है, लेकिन आज यहां की सरकार तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी हुई है।

राम और काली के जरिए पीएम का ममता पर प्रहार

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में राम मंदिर के मुद्दे को बंगाल की स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह अयोध्या में सदियों का इंतजार खत्म हुआ, वैसे ही बंगाल को भी ‘अन्याय’ से मुक्ति मिलने वाली है। उन्होंने मां काली का जिक्र करते हुए ममता सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि जो लोग मां काली का अपमान करते हैं या उनकी पूजा में बाधा डालते हैं, बंगाल की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार और संदेशखाली जैसे मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने वोटरों से अपील की कि वे ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को साकार करने के लिए निर्भीक होकर मतदान करें।

अमित शाह की हुंकार: “गुंडों को उल्टा लटकाकर सीधा करेंगे”

वहीं दूसरी ओर, गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर टीएमसी को घेरा। अमित शाह ने रैलियों में ‘दीदी के गुंडों’ को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अब बंगाल में डर का शासन खत्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और केंद्रीय बल यह सुनिश्चित करेंगे कि हर मतदाता सुरक्षित महसूस करे। शाह ने कड़े लहजे में कहा कि जो लोग वोटरों को धमका रहे हैं या हिंसा का सहारा ले रहे हैं, उनके खिलाफ चुनाव के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट बिछा रखा है, जबकि मूल निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

अस्मिता और सुरक्षा के इर्द-गिर्द सिमटा बंगाल का रण

भाजपा की इस आक्रामक रणनीति ने बंगाल के चुनाव को अब पूरी तरह से ‘सांस्कृतिक अस्मिता बनाम विकास’ की जंग में तब्दील कर दिया है। जहाँ एक तरफ पीएम मोदी धार्मिक भावनाओं और विकास के वादों के जरिए लोगों के दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं अमित शाह ‘लॉ एंड ऑर्डर’ और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं। टीएमसी ने भाजपा के इन हमलों पर पलटवार करते हुए इसे बाहरी लोगों का आक्रमण बताया है। बहरहाल, पीएम और शाह के इन बयानों ने बंगाल के अगले चरणों के मतदान से पहले माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। अब देखना यह है कि राम और काली के नाम पर की गई यह अपील मतपेटियों में कितनी तब्दील होती है।

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