भारत में काम करने वाले एक ईरानी इंजीनियर का बयान इन दिनों चर्चा में है। जम्मू-कश्मीर में बन रही ज़ोजिला सुरंग परियोजना से जुड़े इस इंजीनियर ने भारत को अपना “दूसरा घर” बताया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
कई वर्षों से भारत में काम कर रहे इस इंजीनियर का कहना है कि यहां उन्हें सिर्फ एक कर्मचारी की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह अपनापन मिला। उन्होंने बताया कि अलग देश से आने के बावजूद उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे किसी पराई जगह पर रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का व्यवहार, कार्यस्थल का माहौल और भारतीय संस्कृति ने उन्हें हमेशा सहज महसूस कराया।
ज़ोजिला सुरंग देश की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। यह सुरंग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद इस परियोजना पर काम लगातार जारी है। ऐसे माहौल में विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और इंजीनियर मिलकर काम कर रहे हैं।
ईरानी इंजीनियर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में बिताए गए वर्षों ने उनके जीवन को कई तरह से प्रभावित किया है। उन्होंने यहां की विविधता, लोगों की मेहमाननवाजी और विभिन्न संस्कृतियों के मेल की विशेष रूप से सराहना की। उनका कहना था कि भारत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जब वे पहली बार भारत आए थे, तब उनके मन में कई सवाल और आशंकाएं थीं। लेकिन समय के साथ उन्हें यहां ऐसा माहौल मिला जिसने उन सभी चिंताओं को दूर कर दिया। अब भारत उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी एक खास जगह बन चुका है।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। कई लोगों ने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और मेहमाननवाजी का उदाहरण बताया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे अनुभव यह दिखाते हैं कि पेशेवर सहयोग और मानवीय रिश्ते सीमाओं से कहीं बड़े होते हैं।
ज़ोजिला सुरंग जैसी परियोजनाएं केवल सड़क या परिवहन से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को साथ काम करने का अवसर भी देती हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स में बनने वाले रिश्ते कई बार औपचारिक कार्य संबंधों से आगे बढ़कर व्यक्तिगत जुड़ाव का रूप ले लेते हैं।
फिलहाल इस ईरानी इंजीनियर का बयान लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके शब्द यह दर्शाते हैं कि किसी देश की पहचान केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार और अपनत्व से भी बनती है। शायद यही वजह है कि उन्होंने भारत को अपना “दूसरा घर” कहा।
कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक बयान हो सकता है, लेकिन किसी विदेशी नागरिक द्वारा वर्षों तक किसी देश में रहकर उसे अपना दूसरा घर कहना उस अनुभव और भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाता है जो उसने वहां महसूस किया हो।
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