देश में आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले 11 दिनों के भीतर चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन किया है। ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का दाम 100 रुपये के पार जा चुका है। इस लगातार हो रहे मूल्यवर्धन के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और आर्थिक नीतियों को लेकर कई तीखे सवाल दागे हैं।
विपक्ष के वो 4 तीखे सवाल जिन्होंने बढ़ाई राजनीतिक तपिश
ईंधन के दामों में आई इस अचानक तेजी को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट को कटघरे में खड़ा किया है:
1. चुनाव खत्म होते ही आम जनता पर बोझ क्यों?: विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही सरकार ने जानबूझकर यह बढ़ोतरी की है। विपक्ष ने पूछा कि जब तक मतदान चल रहा था, तब तक तेल कंपनियों ने दाम क्यों रोक कर रखे थे और नतीजे आते ही जनता को क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है?
2. सस्ते कच्चे तेल का मुनाफा कहाँ गया?: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल उठाया कि पिछले कुछ महीनों और बीते 10 वर्षों में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें काफी कम थीं, तब उसका फायदा देश के उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दिया गया? विपक्ष के अनुसार, सरकार ने केंद्रीय करों (Central Taxes) के जरिए भारी कमाई की, तो अब संकट के समय वह राहत देने के बजाय जनता की जेब क्यों काट रही है?
3.वैकल्पिक स्रोतों से सस्ता तेल क्यों नहीं खरीदा?: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की विदेश और ऊर्जा नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब रूस और ईरान जैसे देश भारत को रियायती दरों पर पर्याप्त तेल और गैस देने की पेशकश कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी वहां से सस्ता ईंधन खरीदकर देश को वैश्विक झटकों से क्यों नहीं बचा रहे हैं?
4.महंगाई के इस चौतरफा हमले का तोड़ क्या है?: लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को ‘महंगाई मानव’ (Inflation Man) करार देते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की किश्तों में की जा रही इस बढ़ोतरी से परिवहन महंगा होगा, जिससे सब्जी, दूध और राशन के दाम बढ़ेंगे। विपक्ष ने पूछा है कि इस आर्थिक तूफान से मध्यम वर्ग, किसानों और छोटे व्यापारियों को बचाने के लिए सरकार के पास क्या योजना है?
11 दिनों का गणित: किश्तों में कैसे जेब हुई ढीली?
इस महीने ईंधन की कीमतों में जो बदलाव हुआ है, उसकी रफ्तार ने विशेषज्ञों को भी चौंकाया है:
15 मई:
विधानसभा चुनाव खत्म होने के ठीक बाद पहली बार में करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई।
19 मई: पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ।
23 मई: एक बार फिर ईंधन के दाम औसतन 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए गए।
25 मई: ताजा संशोधन के बाद कुल मिलाकर पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) के दामों में भी ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी गई है।
महानगरों में आज के नए रेट
ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम इस स्तर पर पहुंच गए हैं:
शहर | पेट्रोल (रुपये/लीटर) | डीजल (रुपये/लीटर)
दिल्ली ₹102.12 | ₹95.20 |
मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
चेन्नई ₹107.77 | ₹99.55 |
हैदराबाद ₹115.69 | ₹103.82 |
तिरुवनंतपुरम | ₹115.49 | ₹104.41 |
दाम बढ़ने के पीछे क्या हैं तकनीकी कारण?
सरकारी सूत्रों और तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL, IOC) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था:
पश्चिम एशिया में तनाव: हाल के हफ्तों में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में कच्चा तेल $113 से $114 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
कंपनियों का पुराना घाटा: तेल कंपनियों का दावा है कि उन्होंने लंबे समय तक वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर दाम नहीं बढ़ाए थे और उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाया था। अब पुराने नुकसान (Under-recoveries) की भरपाई के लिए कीमतों को बाजार के अनुरूप करना पड़ रहा है।
विपक्ष ने इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए सरकार से तुरंत एक्साइज ड्यूटी घटाने और दामों को वापस लेने की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक एक बड़ा राजनीतिक दंगल बनने की ओर अग्रसर है।
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