New Delhi: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को लेकर सरकार की नई व्यवस्था के तहत बड़ा कदम सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को 26 मदरसों को मान्यता के प्रमाणपत्र प्रदान किए। इन नए 26 मदरसों को शामिल करने के बाद प्रदेश में अब तक 33 मदरसे नई नीति के तहत पंजीकृत और मान्यता प्राप्त हो चुके हैं। प्रमाणपत्र वितरण का कार्यक्रम सरकारी आयोजन था, जिसमें राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गायन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद मदरसा संचालक भी सम्मानपूर्वक खड़े होकर राष्ट्रगीत में शामिल हुए।
मदरसों में साइंस-टेक्नोलॉजी की पढ़ाई पर CM धामी का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बदलते दौर में मदरसों के विद्यार्थियों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित रखना उचित नहीं है। उन्होंने विज्ञान और तकनीक की शिक्षा को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि आधुनिक विषयों की जानकारी के बिना बच्चे प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते हैं। सीएम ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें उनकी सरकार को मुस्लिम विरोधी बताया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ होती है और कानून का पालन करने वालों को किसी तरह की परेशानी नहीं है।
मदरसा बोर्ड खत्म, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत नया सिस्टम
उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 को मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। नई व्यवस्था में मदरसों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। नए सिलेबस के तहत NCERT आधारित पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसमें विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को अनिवार्य बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य मदरसा विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आगे की पढ़ाई व रोजगार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
मदरसों के संचालकों में नीति को लेकर अलग-अलग राय
नई व्यवस्था के तहत प्रमाणपत्र लेने वाले कई मदरसा संचालकों ने सरकार के कदम का समर्थन किया। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर और व्यापक शिक्षा मिलने से उनका भविष्य मजबूत होगा तथा सरकारी सुविधाओं का लाभ भी उन्हें मिल सकेगा। हालांकि, प्रदेश में सभी मदरसा संचालक इस नीति से सहमत नहीं हैं। विरोध करने वाले संचालकों का तर्क है कि मदरसों का मूल उद्देश्य धार्मिक शिक्षा देना है और नए पाठ्यक्रम के जरिए धीरे-धीरे उनकी पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। गौरतलब है कि पुराने मदरसा बोर्ड के समय प्रदेश में 452 पंजीकृत मदरसे थे, जबकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक केवल 33 मदरसों का पंजीकरण हुआ है। नए सिस्टम के तहत पंजीकरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर निर्धारित की गई है।
मदरसा नीति के बीच निकाहनामे को लेकर भी बड़ा फैसला
उत्तराखंड में मदरसों से जुड़े बदलावों के बीच वक्फ बोर्ड के स्तर पर भी एक अहम निर्णय सामने आया है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने नया निकाहनामा तैयार किया है, जिसमें दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह के लिए दिए जाने वाले अलग-अलग कॉलम हटाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रदेश में मुस्लिम सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े नियमों में हो रहे ये बदलाव आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
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Ms. Pooja, |
