भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें इस समय वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे इस बेहद गंभीर विवाद पर टिकी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच का यह संकट अब अपने सबसे संवेदनशील दौर में पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे विवाद और दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही पीस टॉक यानी शांति वार्ता की सच्चाई को पूरी दुनिया के सामने साफ कर दिया है। ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर एलान किया है कि ईरान के साथ बातचीत अब बिल्कुल अंतिम चरण में है और इसके साथ ही उन्होंने तेहरान को एक बेहद कड़ा और आखिरी अल्टीमेटम भी थमा दिया है। इस सख्त बयान के बाद से पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है क्योंकि इस बातचीत के नतीजे पर ही खाड़ी देशों का भविष्य टिका हुआ है।
या तो तुरंत समझौता होगा या फिर शुरू होगा विनाशकारी एक्शन
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बेहद तल्ख अंदाज में बातचीत करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत ही आक्रामक रुख अपनाया। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि हम ईरान के साथ कूटनीति के आखिरी मुहाने पर खड़े हैं और अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है। उन्होंने तेहरान के हुक्मरानों को सचेत करते हुए कहा कि अगर हमें बहुत जल्द वाशिंगटन की शर्तों पर सही जवाब नहीं मिलते हैं तो मैदान में चीजें बहुत तेजी से बदल जाएंगी। ट्रंप ने बिना किसी लाग लपेट के कहा कि या तो हमारे बीच एक ठोस डील होगी या फिर अमेरिकी सेना कुछ ऐसा करने जा रही है जो ईरान के लिए बेहद अप्रिय और नुकसानदेह होगा लेकिन हमारी सेना इसके लिए पूरी तरह मुस्तैद बैठी है।
कुछ दिन और इंतजार करने को तैयार पर परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं
जब मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सवाल किया कि वे इस समझौते के लिए ईरान को और कितना समय देने के मूड में हैं तो उन्होंने कहा कि वे सिर्फ कुछ ही दिनों का वक्त और दे सकते हैं। यह हफ्ता बीतने तक या अगले हफ्ते की शुरुआत तक का समय ही तेहरान के पास बचा है। ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका के उस पुराने संकल्प को दोहराया कि वे ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे कूटनीति और बातचीत को एक आखिरी मौका सिर्फ इसलिए दे रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि इस इलाके में कम से कम तबाही हो लेकिन अगर ईरान ने जरा सी भी चालाकी दिखाई तो सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता बचेगी।
ईरान का पलटवार और संप्रभुता से समझौता न करने का एलान
दूसरी तरफ ट्रंप के इस अंतिम अल्टीमेटम पर ईरान की ओर से भी बेहद तीखा और आक्रामक जवाब आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने सोशल मीडिया पर साफ कर दिया है कि प्रतिबंधों और धमकियों के दम पर ईरान को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना अमेरिका का सिर्फ एक भ्रम है और वे देश की संप्रभुता से कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी बेहद कड़े लहजे में कहा है कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमला करने की हिमाकत की तो इस बार युद्ध केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचेगा और इसके गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नया नियंत्रण और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट
तनाव के इसी माहौल के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए एक नई पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी खड़ी कर दी है। इसके तहत अब वहां से गुजरने वाले हर एक कमर्शियल जहाज को ईरान की नौसेना से विशेष परमिशन लेनी होगी। हालांकि ईरान ने पिछले चौबीस घंटों में कई जहाजों को वहां से गुजरने का रास्ता दिया है लेकिन इस नए नियम ने पूरी दुनिया के व्यापारिक देशों की नींद उड़ा दी है। इस समुद्री रास्ते पर पैदा हुए नया संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में बड़ी मंदी का खतरा मडराने लगा है। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देशों के जरिए चल रही इस मध्यस्थता के लिए अब अगले दो से तीन दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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