किम जोंग उन की हत्या की साजिश पड़ोसी देशों को पड़ेगी भारी! नॉर्थ कोरिया का नया ‘न्यूक्लियर कानून’ तैयार

Kimjong

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर दुनिया को दहलाने वाला फैसला लिया है। उत्तर कोरिया ने एक नया ‘न्यूक्लियर कानून’ पारित किया है, जो देश की परमाणु शक्ति को ‘अपरिवर्तनीय’ (Irreversible) बनाता है। इस कानून की सबसे खतरनाक बात यह है कि अगर किम जोंग उन की हत्या की कोशिश की गई या उनके नेतृत्व पर कोई खतरा मंडराया, तो उत्तर कोरिया की परमाणु मिसाइलें ‘ऑटोमैटिक’ तरीके से दुश्मन देशों पर हमला कर देंगी।
इस नए कानून ने दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका जैसे पड़ोसी व पश्चिमी देशों की रातों की नींद उड़ा दी है।

ऑटोमैटिक’ परमाणु हमले का प्रावधान
उत्तर कोरिया के नए सैन्य सिद्धांत के अनुसार, अब परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल जवाबी कार्रवाई के लिए नहीं होगा। कानून में स्पष्ट किया गया है कि:
1. नेतृत्व पर हमला यदि उत्तर कोरिया के ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम यानी किम जोंग उन को किसी भी विदेशी हमले या साजिश (Decapitation Strike) से खतरा महसूस होता है, तो परमाणु हमला खुद-ब-खुद शुरू हो जाएगा।

2.प्री-एम्पटिव स्ट्राइक:उत्तर कोरिया अब दुश्मन पर तब भी परमाणु हमला कर सकता है, जब उसे केवल यह ‘आभास’ हो कि उस पर हमला होने वाला है।

3. नो सरेंडर: किम जोंग उन ने साफ कर दिया है कि वे अपने परमाणु हथियारों को कभी नहीं छोड़ेंगे, चाहे देश पर कितने भी कड़े प्रतिबंध क्यों न लगा दिए जाएं।

पड़ोसी देशों के लिए ‘डेथ वॉरंट’
किम जोंग उन का यह कदम सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया की ‘किल चेन’ (Kill Chain) रणनीति का जवाब माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया ने हाल ही में ऐसी तकनीक विकसित करने की बात कही थी, जिससे युद्ध की स्थिति में उत्तर कोरिया के नेतृत्व को तुरंत खत्म किया जा सके।

दक्षिण कोरिया को चेतावनी: किम ने कहा कि यदि पड़ोसी देश ने उनके नेतृत्व को निशाना बनाने की जरा भी हिमाकत की, तो पूरा प्रायद्वीप राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा।

जापान और अमेरिका पर निशाना: उत्तर कोरिया की नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) अब सीधे तौर पर अमेरिकी मुख्य भूमि को निशाना बनाने की क्षमता रखती हैं, और नया कानून इन्हें इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को और आसान बनाता है।

दुनिया के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता?
आमतौर पर परमाणु हथियार संपन्न देश ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले इस्तेमाल नहीं) की नीति अपनाते हैं, लेकिन उत्तर कोरिया का यह नया कानून इसका ठीक उल्टा है। यह कानून ‘अंधाधुंध हमले’ की वकालत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में गलती से परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा (Accidental Nuclear War) कई गुना बढ़ गया है।
किम जोंग उन ने प्योंगयांग की संसद में भाषण देते हुए कहा कि “परमाणु हथियार हमारे देश की गरिमा और अंतिम शक्ति हैं। हम कभी भी अपनी रक्षा नीति से समझौता नहीं करेंगे।”

उत्तर कोरिया के इस कदम ने कूटनीति के सभी रास्तों को लगभग बंद कर दिया है। जहाँ एक तरफ दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं किम जोंग उन के इस ‘सुसाइडल’ परमाणु कानून ने वैश्विक सुरक्षा के सामने एक दीवार खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका इस ‘परमाणु ब्लैकमेलिंग’ का क्या जवाब देते हैं।

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