होर्मुज की खाड़ी में बढ़ा तनाव: ईरान ने 24 घंटे के अंदर मार गिराए अमेरिका के 3 जासूसी ड्रोन

Harmuj

पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद संवेदनशील इलाके में एक बार फिर सैन्य तनातनी काफी बढ़ गई है। ईरान की सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे के दौरान अमेरिकी वायुसेना के तीन आधुनिक और हाई-टेक जासूसी ड्रोनों को मार गिराया है। यह पूरी कार्रवाई होर्मुज की खाड़ी के रणनीतिक हवाई क्षेत्र में हुई है। इस घटना के बाद से ही इस पूरे क्षेत्र में दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बनने लगे हैं।

एक के बाद एक कैसे गिराए गए अमेरिकी ड्रोन?

ईरानी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के एमक्यू-1 प्रेडेटर जासूसी ड्रोन उस समुद्री रास्ते के पास गश्त लगा रहे थे, जहां से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार होता है। ईरान के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ड्रोनों की लोकेशन को तुरंत ट्रैक कर लिया। इसके बाद अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए ईरानी सेना ने एक-एक करके तीनों ड्रोनों को हवा में ही ढेर कर दिया।

आईआरजीसी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दो ड्रोनों को होर्मुज के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में निशाना बनाया गया, जबकि तीसरे ड्रोन को ईरानी सीमा का उल्लंघन करने पर तुरंत ध्वस्त कर दिया गया।

अमेरिका के लिए बड़ा नुकसान

इतने कम समय में तीन अत्याधुनिक जासूसी ड्रोनों का तबाही की भेंट चढ़ जाना अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। एमक्यू-1 जैसे ड्रोन अमेरिका के सबसे भरोसेमंद निगरानी हथियारों में से एक हैं, जिनकी कीमत करोड़ों डॉलर होती है। इस घटना से यह साफ हो गया है कि ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपनी रडार और मिसाइल सुरक्षा प्रणाली को पहले से बहुत ज्यादा मजबूत कर लिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे प्रमुख तेल व्यापारिक मार्गों में से एक है। दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही वजह है कि यहां जरा सी भी सैन्य हलचल पूरी दुनिया को प्रभावित करती है। ईरान ने साफ लहजे में कह दिया है कि उसकी जल सीमा या वायु सीमा में बिना इजाजत आने वाली किसी भी विदेशी सैन्य संपत्ति को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।

वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है बड़ा असर

इस घटना के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं गहरी हो गई हैं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह तनातनी और ज्यादा बढ़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक शिपिंग और कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। फिलहाल अमेरिकी सेना भी इस पूरे इलाके में अपने बाकी जहाजों और निगरानी ड्रोनों को लेकर काफी सतर्क हो गई है।

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