नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। कई इलाकों में पानी का बहाव इतना तेज है कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़कें टूट गई हैं, कई जगहों पर संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है और राहत-बचाव टीमों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत के लिए भी चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी मिली है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। लापता लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।
नेपाल में हालात इतने खराब हैं कि कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना भी आसान नहीं है। भारी बारिश और तेज बहाव के चलते रास्ते बंद हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।
स्थिति को देखते हुए भारत ने भी नेपाल की मदद के लिए कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बातचीत कर मुश्किल की इस घड़ी में हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग ऐसे समय में काफी अहम माना जा रहा है।
बाढ़ का असर भारत-नेपाल आवाजाही पर भी दिखाई दे रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली और काठमांडू के बीच चलने वाली मैत्री बस सेवा को फिलहाल रोक दिया गया है। हालात सामान्य होने के बाद सेवा दोबारा शुरू किए जाने की उम्मीद है।
फिलहाल नेपाल में सबसे ज्यादा ध्यान उन लोगों को सुरक्षित निकालने पर है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। राहत टीमों की कोशिश है कि जल्द से जल्द प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जाए।
आने वाले समय में जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों से संपर्क बहाल होगा, नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक स्थिति भी सामने आ सकती है। फिलहाल 288 भारतीयों के लापता होने की खबर ने उनके परिवारों की चिंता जरूर बढ़ा दी है और सभी को अपनों के सुरक्षित लौटने का इंतजार है।
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