बेंगलुरु में कल शाम जो हुआ, उसने सबको सुन्न कर दिया है। हफ़्तों की झुलसाने वाली गर्मी के बाद आसमान में काले बादल छाए, तो लगा कि सुकून मिलेगा। लोग खिड़कियों से बारिश देखने लगे, बच्चे ओले बटोरने भागे, लेकिन किसे पता था कि ये कुदरत का कोई तोहफा नहीं बल्कि एक बेरहम तबाही थी। महज़ चंद घंटों की बारिश और तूफानी हवाओं ने शहर का हुलिया बिगाड़ दिया और अलग-अलग हादसों में 10 लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
एक मासूम की मौत ने सबको रुलाया
सबसे दिल दहला देने वाली खबर शिवाजीनगर के बाउरिंग अस्पताल से आई। यहाँ अस्पताल की एक पुरानी दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। उस वक्त बारिश से बचने के लिए कुछ लोग दीवार के नीचे खड़े थे। मलबे के नीचे दबने से सात लोगों की जान चली गई।
इनमें 6 साल की मुसफिरा भी थी। पता चला है कि वह अपने जन्मदिन के लिए नए कपड़े खरीदने बाजार निकली थी, लेकिन घर लौटने से पहले ही मौत ने उसे घेर लिया। एक पिता अपनी बेटी को गोदी में उठाकर अस्पताल की ओर भाग रहा था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
शहर का कोना-कोना बना ‘ट्रैप’
सिर्फ दीवार गिरना ही इकलौता हादसा नहीं था। शहर की सड़कें मौत का जाल बन गई थीं:
**बन्नेरघट्टा रोड* पर एक मोची, जो शायद दिनभर की कमाई समेट कर घर जाने की तैयारी में था, करंट की चपेट में आ गया और वहीं दम तोड़ दिया।
**चामराजपेट** में एक घर की छत गिरने से 35 साल के मंजूनाथ की मौत हो गई। वह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था।
* कई जगहों पर बिजली के तार पानी में गिर गए, जिससे राह चलते लोग और बेजुबान जानवर शिकार बन गए।
### **रिकॉर्ड तोड़ बारिश और हर तरफ बर्बादी**
कल की बारिश ने पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। एमजी रोड और कोरमंगला जैसे पॉश इलाकों में सड़कों पर ओलों की सफेद चादर बिछी थी, जो देखने में तो सुंदर थी लेकिन उसके पीछे छिपा खतरा भयानक था। शहर में 200 से ज़्यादा पेड़ उखड़ गए, जो गाड़ियों और घरों पर जा गिरे। कई इलाकों में पूरी रात अंधेरा छाया रहा क्योंकि बिजली के खंभे ताश के पत्तों की तरह गिर
*व्यवस्था पर उठते सवाल
हादसे के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मृतकों के परिवारों को ₹5 लाख के मुआवजे का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों में गुस्सा है। लोगों का पूछना है कि क्या हर मानसून में बेंगलुरु को इसी तरह डूबना होगा? क्या जर्जर दीवारें और खुले तार ही हमारी किस्मत हैं?
फिलहाल शहर में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी है। प्रशासन मलबा साफ करने और गिरे हुए पेड़ों को हटाने में जुटा है, लेकिन उन परिवारों के लिए यह जख्म कभी नहीं भरेगा जिन्होंने कल की बारिश में अपनों को खो दिया।
सावधानी जरूरी:
अगले कुछ दिन और भारी हो सकते हैं। अगर जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें, पुराने पेड़ों और ढहती हुई दीवारों से दूर रहें। सुरक्षित रहें।
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