New Delhi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में आयोजित शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी का पीडीए सामाजिक न्याय के बजाय परिवार और चुनिंदा लोगों के हितों तक सीमित है। सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के पीडीए का मतलब ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है और ज्यादा से ज्यादा इसे ‘पराया धन अपना’ कहा जा सकता है।
सपा के राज्यसभा टिकटों को लेकर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी ने दो प्रत्याशियों को टिकट दिया, लेकिन उसके पीडीए की चर्चा के अनुरूप पिछड़े और दलित वर्ग के प्रतिनिधियों को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक टिकट अपने चाचा को दिया गया, जबकि दूसरी सीट मुंबई के एक धन्नासेठ को दे दी गई। सीएम योगी ने सवाल उठाया कि सपा काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी यादव नेता को उम्मीदवार बना सकती थी। इसी तरह किसी दलित या मुस्लिम नेता को भी मौका दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इन फैसलों को परिवारवाद और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता देने का उदाहरण बताया।
भर्ती आयोग के अध्यक्ष और चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में सीएम योगी ने सपा सरकार के कार्यकाल में सरकारी भर्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय अनिल यादव को भर्ती आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि वह इस पद के योग्य नहीं थे। योगी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एक परीक्षा का जिक्र करते हुए दावा किया कि हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए में तीसरी श्रेणी से उत्तीर्ण एक अभ्यर्थी को आयोग की परीक्षा में शीर्ष स्थान दिलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं होती थीं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। साथ ही, उन्होंने उस दौर में दंगों, उपद्रव और माफिया के प्रभाव का भी जिक्र किया।
‘सैफई सिंडिकेट’ के जरिए नौकरियां देने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर परिवार के लोगों के प्रभाव में भर्ती प्रक्रिया चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय युवाओं को नौकरी पाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उनके मुताबिक, भर्ती व्यवस्था में परिवार के लोगों को प्रभावशाली पदों पर बैठाया गया था और चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए निकलती थी। योगी ने आरोप लगाया कि उस दौर में ‘सैफई सिंडिकेट’ का दबदबा था और उसके दायरे से बाहर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी हासिल करना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि जब सरकार की कार्यप्रणाली में ही गति नहीं थी, तो युवाओं की प्रगति कैसे होती। उनके अनुसार, इसी व्यवस्था के कारण युवाओं की दुर्गति हुई।
9 साल में साढ़े 9 लाख नौकरियां, अगले 6 महीने में 1 लाख नियुक्ति पत्र देने का दावा
सीएम योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार के पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश के करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले छह महीनों के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। योगी ने कहा कि नियुक्तियों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने यह समयसीमा तय की है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री कांग्रेस पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि यदि पार्टी इसी तरह काम करती रही, तो उसके पास जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ सकता है।
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Ms. Pooja, |
