खेल के मैदान में फिर गरमाया नो-हैडशेक का मुद्दा: पाकिस्तानी कप्तान का सनसनीखेज खुलासा

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भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मुकाबला हो और कोई विवाद न हो ऐसा मुमकिन नहीं। इस बार जो ‘जिन्न’ बाहर निकला है वह है ‘नो-हैडशेक’ यानी हाथ न मिलाने का मुद्दा। हाल ही में पाकिस्तानी कप्तान के एक खुलासे ने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरियों ने अब खिलाड़ियों के आपसी व्यवहार को भी पूरी तरह बदल दिया है।

क्या हुआ मैदान पर?

पाकिस्तानी कप्तान का कहना है कि मैच के बाद खिलाड़ियों के बीच वो पुरानी गर्मजोशी अब कहीं खो गई है। पहले जहां मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमें एक-दूसरे का अभिवादन करती थीं और खेल भावना का प्रदर्शन होता था अब वहां एक अजीब सी चुप्पी और दूरी दिखाई देती है। कप्तान का इशारा साफ है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत मनमुटाव नहीं है बल्कि इसके पीछे कहीं न कहीं दोनों देशों के राजनीतिक तनाव की छाया पड़ रही है।

सियासी तनाव की मार खेल पर?

अक्सर कहा जाता है कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए लेकिन भारत और पाकिस्तान के केस में यह थ्योरी दशकों से फेल होती रही है। पाकिस्तानी कप्तान के मुताबिक अब खिलाड़ी भी अपनी सीमाएं समझ गए हैं। हाथ न मिलाने या अभिवादन न करने के पीछे कोई एक वजह नहीं है बल्कि यह एक ‘अघोषित नियम’ सा बन गया है। सोशल मीडिया पर फैंस का दबाव और दोनों तरफ के खिलाड़ियों के बीच बढ़ती असहजता ने इस शिष्टाचार को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

खेल भावना पर उठते सवाल

क्रिकेट के दिग्गज मानते हैं कि अगर खिलाड़ी मैदान पर एक-दूसरे का सम्मान नहीं कर सकते तो यह खेल के लिए बहुत बुरा संकेत है। हार-जीत खेल का हिस्सा है लेकिन ‘हैडशेक’ (हाथ मिलाना) हारने वाली टीम की खेल भावना का प्रतीक होता है। यदि इस परंपरा में भी नफरत या राजनीति की दीवार खड़ी हो जाए तो मैच का मजा किरकिरा होना तय है।

क्या फैंस भी बदल रहे हैं?

इस विवाद ने फैंस के बीच भी दो धड़े बना दिए हैं। एक तरफ वो लोग हैं जो इसे पूरी तरह गलत मानते हैं और खिलाड़ियों को पेशेवर बने रहने की सलाह देते हैं वहीं दूसरी तरफ वो लोग भी हैं जो मानते हैं कि सीमा पर तनाव के बीच मैदान पर हंसी-मजाक करना उन्हें गलत लगता है। पाकिस्तानी कप्तान का यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों देशों के खिलाड़ी इस समय भारी मानसिक दबाव में हैं।

अब सवाल यह है कि क्या यह ‘नो-हैडशेक’ का दौर सिर्फ एक मैच का वाकया है या आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान के मैचों में खेल भावना का पूरी तरह से अंत हो जाएगा? कप्तान के इस खुलासे के बाद आईसीसी के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है कि वह कैसे खिलाड़ियों को खेल के सम्मान के प्रति फिर से एकजुट करे।

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