दिल्ली की गलियों में इन दिनों एक अलग ही तरह की सियासी हलचल है। मामला कोई चुनाव का नहीं बल्कि मशहूर कवि और राम कथा वाचक कुमार विश्वास की राम कथाका है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कुमार विश्वास के इन कथा वाले पोस्टरों को ‘आम आदमी पार्टी’ के दफ्तर के आसपास देखा गया। इन पोस्टरों पर लिखे आप भी आमंत्रित हैं वाले संदेश ने दिल्ली के सियासी गलियारों में कई तरह के सवालों को जन्म दे दिया है।
आमंत्रण या कोई गहरा सियासी इशारा?
कुमार विश्वास का आम आदमी पार्टी से पुराना नाता रहा है जो कड़वाहट और विवादों के साथ खत्म हुआ था। ऐसे में उनके पोस्टर का पार्टी दफ्तर के आसपास दिखना महज एक इत्तेफाक माना जाए या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति है यह बहस का मुद्दा बन गया है। कुछ लोग इसे कुमार विश्वास का ‘सॉफ्ट पावर’ दिखाने का तरीका मान रहे हैं तो कुछ इसे सीधे तौर पर पार्टी की मौजूदा लीडरशिप के लिए एक कटाक्ष देख रहे हैं।
सियासी मंच बना ‘राम कथा’ का पंडाल
राम कथा के बहाने दिल्ली की जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की यह कोशिश कई तरह के कयास लगा रही है। क्या कुमार विश्वास इस कथा के जरिए दिल्ली में कोई नया संवाद शुरू करना चाहते हैं? या फिर यह पोस्टर उस अतीत की याद दिलाने के लिए लगाए गए हैं जिसे पार्टी आज भुलाना चाहती है? पोस्टर पर लिखा आप भी आमंत्रित हैं अब एक ऐसा आमंत्रण बन चुका है जिसे न तो कोई नजरअंदाज कर पा रहा है और न ही कोई खुलेआम स्वीकार करने की स्थिति में है।
पार्टी दफ्तर पर गरमाई राजनीति
आम आदमी पार्टी ने फिलहाल इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया तो नहीं दी है लेकिन पार्टी के भीतर इस आमंत्रण को लेकर दबी जुबान में चर्चाएं तेज हैं। जो लोग कुमार विश्वास की शैली को जानते हैं उन्हें पता है कि वे बातों को कितनी खूबसूरती से तीरों में बदल देते हैं। पोस्टर लगाना और फिर उस पर आमंत्रण का शीर्षक देना उनकी पुरानी कवि-राजनेता वाली शैली की याद दिलाता है।
दिल्ली की जनता का क्या नज़रिया?
दिल्ली वाले फिलहाल इस बात से अनजान हैं कि यह पोस्टर सिर्फ राम भक्ति का हिस्सा है या आने वाली किसी बड़ी सियासी स्क्रिप्ट की प्रस्तावना। लेकिन एक बात तो तय है—कुमार विश्वास ने एक बार फिर दिल्ली की हवा में अपनी मौजूदगी का अहसास करा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘राम कथा’ आगे चलकर सियासत के कौन से पन्ने खोलती है। क्या यह आमंत्रण कोई सुलह की शुरुआत है या फिर यह आने वाले दिनों में और बड़े विवादों का निमंत्रण है?
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