सुलभ नहीं सुप्रिया का सफर: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर फंसीं सुप्रिया सुले, बीच सड़क पर लोगों से किया संवाद

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रायगढ़। मुंबई और पुणे के बीच का सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए एक्सप्रेसवे पर जाम लगना कोई नई बात नहीं है, लेकिन शनिवार को इस जाम ने एक अलग ही तस्वीर पेश की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले जब इस जाम में फंसीं, तो उन्होंने गाड़ी में बैठने के बजाय सड़क पर उतरकर लोगों का हाल जानना बेहतर समझा।
सुप्रिया सुले पुणे से मुंबई की ओर जा रही थीं, तभी खंडाला घाट के पास भारी ट्रैफिक जाम लग गया। यह जाम इतना भीषण था कि गाड़ियाँ रेंगने तक की स्थिति में नहीं थीं। सुले खुद भी इस जाम में पिछले 2 घंटे से फंसी हुई थीं।

जब सांसद ने संभाली ‘मैदान’ की कमान

आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा घेरे और सायरन का इस्तेमाल कर रास्ता साफ कराया जाता है, लेकिन सुप्रिया सुले ने सादगी का परिचय दिया। वे अपनी कार से नीचे उतरीं और आसपास फंसी अन्य गाड़ियों के ड्राइवरों और मुसाफिरों से बात करने लगीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुप्रिया सुले को यह कहते सुना जा सकता है, “मुझे यहाँ फंसे हुए 2 घंटे हो चुके हैं। मैं समझ सकती हूँ कि आम लोगों और परिवारों को कितनी परेशानी हो रही होगी।”

क्या रही बातचीत?

सड़क पर खड़े होकर उन्होंने कई वाहन चालकों से चर्चा की:

1. परेशानी का जायजा:उन्होंने ड्राइवरों से पूछा कि वे कितनी देर से रुके हैं और क्या उनके पास पानी या अन्य जरूरी सामान है।

2. प्रशासन पर सवाल: उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी जाम की वजह पूछी और जल्द से जल्द रास्ता साफ कराने का अनुरोध किया।

3. मुसाफिरों का साथ: एक बस में सफर कर रहे यात्रियों ने जब सांसद को सड़क पर देखा, तो वे भी उनसे अपनी शिकायतें साझा करने लगे।

एक्सप्रेसवे या ‘स्ट्रेस-वे’?
सुप्रिया सुले ने इस घटना के बाद राज्य सरकार और सड़क प्रशासन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि टोल की मोटी रकम वसूलने के बावजूद एक्सप्रेसवे पर बुनियादी प्रबंधन की कमी है। घंटों तक जाम में फंसे रहना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।

जाम की वजह एक खराब हुआ भारी वाहन और वीकेंड पर बढ़ने वाली गाड़ियों की संख्या बताई गई। हालांकि, सुप्रिया सुले के इस ‘जमीनी’ अंदाज ने वहां फंसे लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी, क्योंकि उन्हें लगा कि कम से कम कोई उनकी समस्या को करीब से देख रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रिया सुले ने इस तरह से आम जनता के बीच जाकर संवाद किया हो, लेकिन एक्सप्रेसवे के बीचों-बीच दो घंटे तक जाम झेलना और फिर लोगों से फीडबैक लेना चर्चा का विषय बना हुआ है।

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