मध्य प्रदेश के जबलपुर में भेड़ाघाट के पास धुआंधार जलप्रपात के शांत दिखने वाले पानी में मंगलवार की शाम जो हुआ, वह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक और मानवीय लापरवाही का एक ऐसा पुलिंदा है जिसने 9 परिवारों के चिराग बुझा दिए। इस त्रासदी ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है।
तथ्यों की पड़ताल करने पर जो बातें सामने आई हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। यहाँ जानिये आखिर उस शाम क्या हुआ और कहाँ चूक हुई।
जब नाव डूबने लगी, तब बांटी गईं जैकेट
इस पूरे हादसे की सबसे चौंकाने वाली और आक्रोश पैदा करने वाली बात प्रत्यक्षदर्शियों का बयान है। नियमों के मुताबिक, नाव में सवार होने से पहले हर पर्यटक को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ कहानी बिल्कुल उलट थी:
देर से कार्रवाई:
चश्मदीदों के अनुसार, जब नाव बीच मझधार में डगमगाने लगी और उसमें पानी भरने लगा, तब नाविकों ने घबराहट में लाइफ जैकेट निकालनी शुरू कीं।
पहनने का मौका नहीं मिला: डूबती नाव पर मची अफरातफरी और चीख-पुकार के बीच लोगों को जैकेट पहनने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग जैकेट हाथ में लिए ही पानी में समा गए।
हादसे की मुख्य वजहें: क्षमता से अधिक बोझ और खराब मौसम
जांच में सामने आई शुरुआती जानकारी इस त्रासदी के पीछे तीन बड़े कारण बताती है:
ओवरलोडिंग: नाव की क्षमता 10-12 लोगों की थी, लेकिन बताया जा रहा है कि उस पर 18 से 20 लोग सवार थे। मुनाफे के लालच में ऑपरेटरों ने सुरक्षा को ताक पर रख दिया।
अचानक आया तूफान: शाम के वक्त तेज हवाएं और अचानक हुई बारिश ने लहरों को बेकाबू कर दिया। ओवरलोड नाव इन लहरों का संतुलन नहीं झेल पाई।
3.इंजन फेल होना: कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पानी भरने की वजह से नाव का इंजन बंद हो गया था, जिससे नाव पूरी तरह लहरों के रहम-ओ-करम पर आ गई और चट्टान से टकराकर पलट गई।
मृतकों में बच्चे और महिलाएं शामिल
हादसे के बाद जब गोताखोरों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो मंजर बेहद गमगीन था। मरने वाले 9 लोगों में 3 बच्चे और 4 महिलाएं शामिल थीं। ये सभी लोग गर्मियों की छुट्टियां मनाने आए थे, लेकिन नर्मदा की लहरें उनके लिए काल बन गईं।
प्रशासन की ‘नींद’ पर सवाल
जबलपुर का यह इलाका पर्यटन के लिए मशहूर है, लेकिन यहाँ सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।
बिना लाइसेंस की नावें:क्या उस नाव के पास फिटनेस सर्टिफिकेट था?
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निगरानी का अभाव: क्या घाट पर कोई गार्ड तैनात था जिसने ओवरलोडिंग को नहीं रोका?
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन सवाल वही है— **क्या किसी की लापरवाही की कीमत सिर्फ चंद लाख रुपयों से चुकाई जा सकती है?**
सबक: अगर आप भी किसी हिल स्टेशन या नदी किनारे घूमने जा रहे हैं, तो बिना लाइफ जैकेट पहने नाव में कदम न रखें। अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाएं, क्योंकि व्यवस्था अक्सर हादसे के बाद ही जागती है।
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