पाकिस्तान को हराने पर पागलपन क्यों?

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मालद्वीव में खेले जा रहे सैफ अंडर 20 के एक मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को हरा कर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली हैl भले ही इस खबर को क्रिकेट की तरह उछाल नहीं मिल पाया है लेकिन आम तौर पर ऐसी ख़बरों की अनदेखी करने वाले प्रचार माध्यमों ने खबर का वजन बढ़ाया जरूर है l क्रिकेट की ख़बरों से पटे रहने वाले प्रिंट मीडिया ने खबर को कुछ पंक्तियों में स्थान देकर फुटबाल पर बड़ा अहसान किया है तो सोशल मीडिया कुछ ज्यादा ही मेहरबान है और पाकिस्तान की पिटाई पर खूब चटखारे ले रहा है l
देखा जाए तो खबर बड़ी और धमाकेदार कदापि नहीं है क्योंकि भारतीय युवाओं ने ब्राज़ील या फ़्रांस को तो हराया नहीं l लेकिन पाकिस्तान क्योंकि हमारा सबसे करीबी दुश्मन है इसलिए भारतीय जीत का महत्व जरूर बढ़ जाता है l यह भी सच है कि पाकिस्तानी फुटबाल की हैसियत उसकी हॉकी या क्रिकेट जैसी कभी नहीं रही l दोनों ही खेलों में मुकाबला प्राय कांटे का रहता आया है l लेकिन फुटबाल में भारत ने सीनियर और जूनियर स्तर पर पाकिस्तान को बार बार जम कर सबक सिखाया है l यह भी सच है कि कभी महाद्वीप की फुटबाल में भारत एक बड़ी ताकत था लेकिन अब ऐसा नहीं है l भारत की गिनती अब फिसड्डियों में है, जबकि पाकिस्तान महांफिसड्डी l ऐसे में पाकिस्तान को हराने पर हो हुल्लड़ मचाना और पागलपन की हद तक जाना कहाँ तक ठीक है? यह ना भूलें कि बीते सालों में भारत ने पाकिस्तान को अनेक अवसरों पर बुरी तरह धुना l यह बात अलग है कि पिछले कुछ सालों से दोनों पडोसी आरोप प्रत्यारोप के खेल में व्यस्त हैं l

फिलहाल देश का सोशल मीडिया पाकिस्तान पर मिली जीत को लेकर पगलाया हुआ है l ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे ब्राज़ील या फ़्रांस को हरा दिया हो l यही अति उत्साह और बेकार की अकड़ भारतीय फुटबाल पर भारी पड़े है l यह ना भूलें कि नेपाल, बांग्लादेश, अफगनिस्तान, म्यांमार और कई अन्य पिछड़े फुटबाल राष्ट्र हमें पीट गिराते हैं और कई बार हमारी फुटबाल की हवा निकाल चुके हैं l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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