New Delhi: भारत के स्टार शॉट पुटर तजिंदरपाल सिंह तूर ने शनिवार को एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के गोला फेंक मुकाबले में सिल्वर मेडल जीतकर एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की। तूर ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 20.64 मीटर की दूरी तक गोला फेंका और दूसरे स्थान पर रहे। ईरान के मोहम्मदरेजा तैयबीसे ने 20.81 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता और 2018 में तूर द्वारा बनाए गए 20.75 मीटर के एशियन गेम्स रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सऊदी अरब के मोहम्मद टोलू ने 20.48 मीटर के प्रयास के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। तूर के लिए यह एशियन गेम्स में तीसरा पदक है। इससे पहले वह 2018 जकार्ता और 2022 हांगझोऊ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
पंजाब के गांव से शुरू हुआ शॉट पुट का सफर
13 नवंबर 1994 को पंजाब के खोसा पंडो गांव में किसान परिवार में जन्मे तजिंदरपाल का बचपन से ही खेलों की ओर रुझान रहा। उन्हें खेल का जुनून अपने पिता करम सिंह और चाचा गुरदेव सिंह से मिला। करम सिंह गांव और आसपास के क्षेत्रों में रस्साकशी के लिए पहचाने जाते थे, जबकि उनके चाचा गुरदेव सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शॉट पुट में पदक जीत चुके थे। तजिंदरपाल ने शुरुआती प्रशिक्षण चाचा की देखरेख में लिया और जल्द ही राज्य व अंतर-राज्यीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। 2016 फेडरेशन कप में शॉट पुट का खिताब जीतना उनके करियर की शुरुआती बड़ी उपलब्धियों में रहा। उन्होंने 2017 में 20.40 मीटर के थ्रो के साथ खिताब का बचाव किया। उसी साल जून में अल्माटी के कोसानोव मेमोरियल में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता और इसके बाद एशियाई चैंपियनशिप में 19.77 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर हासिल किया।
2018 ने बदली पहचान, एशियन गेम्स में बनाया रिकॉर्ड
2018 तजिंदरपाल के करियर का निर्णायक साल साबित हुआ। उन्होंने लगातार तीसरी बार फेडरेशन कप का खिताब जीता और गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां वह आठवें स्थान पर रहे। इसके बाद जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने 20.75 मीटर का थ्रो करते हुए न केवल गोल्ड मेडल जीता बल्कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड और एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। हालांकि भारत लौटने के बाद पिता करम सिंह के निधन की खबर ने उन्हें गहरा झटका दिया। पिता की कैंसर से हुई मौत के बाद तजिंदरपाल ने अपने ओलंपिक सपने को पूरा करने का संकल्प और मजबूत किया। 2019 में उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता और 20.92 मीटर के थ्रो के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी कायम किया।
रिकॉर्ड थ्रो से ओलंपिक तक, चोटों ने भी नहीं रोका
कोविड-19 के कारण 2020 का सीजन प्रभावित रहा, लेकिन 2021 में तजिंदरपाल ने दमदार वापसी की। उन्होंने भारतीय ग्रां प्री में 19.49 और 20.09 मीटर के थ्रो किए तथा फेडरेशन कप में 20.58 मीटर के प्रदर्शन के साथ खिताब जीता। इसके बाद चौथी भारतीय ग्रां प्री में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 21.49 मीटर का थ्रो कर राष्ट्रीय और एशियाई रिकॉर्ड कायम किया और टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। यह उनका पहला ओलंपिक था, लेकिन कलाई की चोट के कारण वह फाइनल में नहीं पहुंच सके और 13वें स्थान पर रहे। 2022 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप से पहले प्रशिक्षण के दौरान कमर में चोट लगने के कारण उन्हें प्रतियोगिता से हटना पड़ा। सितंबर 2022 में उन्होंने प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में वापसी की और फिर लगातार बड़े मुकाबलों में पदक जीतने का सिलसिला जारी रखा।
एशिया में लगातार सफलता, अब 2026 में सिल्वर से बढ़ा पदकों का कारवां
2023 तजिंदरपाल के लिए बेहद सफल रहा। उन्होंने एशियाई इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप और हांगझोऊ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। पेरिस 2024 ओलंपिक से पहले भी उन्हें चोट से जूझना पड़ा, लेकिन उन्होंने समय पर वापसी कर ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह पेरिस में शॉट पुट के फाइनल में जगह नहीं बना सके। 2025 में उन्होंने नेशनल गेम्स में गोल्ड जीतकर अपनी निरंतरता बरकरार रखी। अब 2026 एशियन गेम्स में 20.64 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीतकर तजिंदरपाल ने महाद्वीपीय खेलों में अपना तीसरा पदक हासिल कर लिया है। उनके प्रमुख पदकों में 2017 एशियाई चैंपियनशिप का सिल्वर, 2018 और 2022 एशियन गेम्स के गोल्ड, 2019 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप का गोल्ड, 2023 एशियाई इंडोर और एथलेटिक्स चैंपियनशिप के गोल्ड तथा 2023 एशियन गेम्स का गोल्ड शामिल है।
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