मज़ाक बन गए हैं गुलाम देशों के खेल

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कॉमनवेल्थ गेम्स का स्तर और हैसियत कितनी है इस बार के आयोजन से साफ नज़र आता है l आयोजक देश ऑस्ट्रेलिया का हाथ खींचना, खेलों की संख्या घरना, प्रमुख खेलों को बाहर करना और खिलाड़ियों और देशों का इन खेलों को गंभीरता से नहीं लेना जैसे कारण बताते हैं कि गुलाम देशों का खेल आयोजन दम तोड़ने की कगार पर है l तारीफ की बात यह है कि भारत को 2030 के खेल मिले हैं क्योंकि सामने कोई दावेदार नहीं था l सीधा सा मतलब है कि कॉमनवेल्थ खेल महज मज़ाक बन कर रह गए हैं l

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शुभारम्भ हो चुका है इस आयोजन में 10 खेलों की 215 स्पर्धाएं होंगी जिनमें इस बार बैडमिंटन, रेसलिंग और टेबल टेनिस को शामिल नहीं किया गया है l हॉकी और क्रिकेट जैसे खेलों को भी बाहर रखा गया है, जिसकी वजह से भारतीय खेमे में चिंता और सुगबुगाहट व्याप्त है l इसलिए क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों द्वारा जीते जाने वाले पदकों की संख्या पर सीधा असर पड़ना तय है l भारतीय दल में 126 एथलीट शामिल हैं, जोकि आठ स्पर्धाओं में भाग लेंगे। लेकिन कुछ प्रमुख खेलों को बहार रखने के चलते भारतीय दल की कामयाबी पर सीधा असर पड़ेगाl पिछले खेलों में भारतीय पहलवानों ने 12 पदक जीत कर पदक तालिका में सम्मानजनक स्थान दिलाया था l टेबल टेनिस में 7 और बैडमिंटन में भी 6 पदक आए थे। । इसके अलावा टेबल टेनिस में भारत ने 4 और बैडमिंटन में 3 स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। लेकिन इस बार ये तीनों खेल कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर कर दिए गए हैं l

इस बार के खेलों में 10 खेल शामिल हैं, जिनमें एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, स्विमिंग, पैरा स्विमिंग, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, ट्रैक साइक्लिंग, पैरा ट्रैक साइक्लिंग, नेटबॉल, वेटलिफ्टिंग, पैरा पावरलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो, बॉल्स, पैरा बॉल्स, 3×3 बास्केटबॉल और 3×3 व्हीलचेयर बास्केटबॉल शामिल हैं। हॉकी और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय और भारतीय नजरिए से पदक पाने वाले खेलों और रैकेट स्पोर्ट्स को को भी शामिल नहीं किए जानेका सीधा सा मतलब है कि भारत को पदक तालिका में उच्च स्थान पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी l

कम खेलों को आयोजित करने का कारण यह है कि पहले इन खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया शहर को मिली थी लेकिन अचानक उसके हटने के बाद ग्लास्गो की लेट एंट्री हुई। स्कॉटलैंड ने शॉर्ट नोटिस पर होस्टिंग संभाली, जिसके बाद कम बजट की वजह से कॉस्ट-कटिंग की गई और खेलों कि संख्या 19 से घट कर 10 पर सिमट गई l अर्थात कॉमनवेल्थ खेल मज़ाक बन गए हैं, खेलों की हैसियत घटी है l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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