भले ही दद्दा ध्यानचंद और बलबीर सिंह सीनियर के नाम तीन – तीन ओलम्पिक गोल्ड हैं लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धा में हमारा सुपर स्टार यदि कोई है तो वह सिर्फ और सिर्फ नीरज चोपड़ा हो सकता है, जिसने बैक टू बैक दो ओलम्पिक पदक ( 2020 में गोल्ड और 2024 में सिल्वर ) जीतकर भारतीय एथलेटिक्स को विश्व स्तर पर स्थापित किया है। वही नीरज चोपड़ा आजकल इसलिए सुर्खियों में हैं, क्योंकि वह एक द्रोणाचार्य कोच की मनमानी से खफा है। नीरज के अलावा पैरा एथलीट दीपा शर्मा और सुमित अंतिल ने भी उसके विरुद्ध आवाज मुखर की है। हालांकि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने माना है कि उसे लिखित में शिकायत मिली है लेकिन कोच साहब उसके कर्मचारी नहीं है (है ना कमाल की बात )।
कुछ मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कोच का व्यवहार एथलीटों के साथ अभद्र रहा है। भद्दी गालियां देना, दुत्कारना और मनमर्जी से पेश आना उसकी आदत रही है।
यूँ तो भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन के पास सैकड़ों शिकायतें पेंडिंग हैं। खेल प्राधिकरण (साईं ) ने भी शायद ही कभी खिलाड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया हो। लेकिन सालों से सुस्त पड़े साई और एथलेटिक्स फेडरेशन को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब नीरज चोपड़ा जैसा चैंपियन खिलाड़ियों के हित में आगे आता है तो जान लेना चाहिए कि मामला गंभीर है। ऐसे में देश के खेल मंत्रालय को चाहिए कि एथलेटिक्स फेडरेशन और साई की उदासीनता के कारणों को जाने। यह ना भूलें कि शिकायत करने वाला कोई ऐरा गैरा नहीं हैं। देश के जाने-माने खिलाड़ियों, ओलम्पिक पदक विजेताओं और खेल के चाहने वालों की राय में कोच यदि कसूरवार है, बदतमीज है और आरोप सही पाए जाते हैं तो उसे कड़ी सजा जरूर मिलनी चाहिए।
यह ना भूलें कि भारतीय एथलेटिक्स ने नीरज की कामयाबी के चलते अपना नाम सम्मान ऊंचा किया है l वही एथलेटिक्स फेडरेशन सालों से शक के घेरे में हैl कॉमनवेल्थ खेलों के असली गुनहगार और देश के एथलीटों को डोप बांटने वाले इसी फेडरेशन के सगे रहे हैं। फेडरेशन के गिरते सम्मान को नीरज ने सहारा दिया है, विश्व स्तर पर बड़ी पहचान दिलाई है l अब यदि नीरज ने सवाल किया है तो जवाबी कार्यवाही अवश्य होनी चाहिए। वरना भारतीय एथलेटिक्स और साई की वर्किंग पर कुछ और सवाल उठ सकते हैँ, दाग लग सकते हैं। वैसे भी एथलीटों की नशाखोरी के चलते भारत का नाम नंबर एक नशाखोर देश के रूप में बदनाम हो चुका है l बस एक और चूक हुई तो खिलाड़ियों की अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी पर प्रतिबंध भी लग सकता है l बेहतऱ यही होगा कि होगा कि बदमिजाज कोच को तुरंत सजा सुनाई जाए l गुनाह साबित हों तो उसका द्रोणाचार्य सम्मान भी छीन लिया जाना चाहिए l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
