New Delhi: एशियन गेम्स में सहारनपुर की धाविका प्राची चौधरी ने महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया। प्राची ने 53.21 सेकेंड के समय के साथ रेस पूरी की और तीसरे स्थान पर रहीं। दूसरे स्थान पर रहने वाली धाविका ने 52.38 सेकेंड का समय दर्ज किया। हालांकि प्राची अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 52.57 सेकेंड के समय को पीछे नहीं छोड़ सकीं, लेकिन एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर कांस्य पदक जीतना उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है। वर्ष 2014 में एथलेटिक्स की शुरुआत करने वाली प्राची ने करीब एक दशक की मेहनत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है।
किसान पिता ने उधार लेकर दिलाए थे स्पाइक
सहारनपुर के गांव झबीरन की रहने वाली प्राची चौधरी का खेल सफर सुविधाओं से ज्यादा संघर्ष और परिवार के भरोसे से बना है। उनके पिता जयवीर सिंह किसान हैं, जबकि मां राजेश देवी गृहिणी हैं। बेटी की प्रतिभा और खेल के प्रति जुनून को देखते हुए पिता ने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद कभी उधार लेकर उनके लिए स्पाइक जूते खरीदे थे। परिवार के अनुसार, प्राची की मेहनत और प्रतिभा को देखते हुए उनके कोच एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी डॉ. अशोक गुप्ता को भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी। प्राची के चाचा सचिन के मुताबिक उनके दो भाई अंकित और प्रियांशु हैं, जिनमें से एक निजी नौकरी करता है और दूसरा पढ़ाई कर रहा है। प्राची खुद रेलवे में कार्यरत हैं।
डोप टेस्ट में फंसीं, जांच के बाद मिली राहत
प्राची के करियर में एक मुश्किल दौर वर्ष 2021 में भी आया, जब प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के मामले में उनका डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। हालांकि बाद की जांच में यह सामने आया कि प्रतिबंधित दवा का सेवन उन्होंने जानबूझकर नहीं किया था और यह गलती से उनके शरीर में पहुंची थी। इसके बाद उन पर लगाया गया प्रतिबंध कम कर दिया गया। इस चुनौतीपूर्ण दौर के बाद प्राची ने वापसी की और अपने प्रदर्शन पर लगातार मेहनत करते हुए एशियन गेम्स में पदक जीतने का लक्ष्य हासिल किया। उनका कांस्य पदक मुश्किल दौर के बाद की उनकी वापसी को भी दर्शाता है।
4×400 मीटर रिले में भी भारत का प्रतिनिधित्व
प्राची चौधरी सिर्फ 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा की धाविका नहीं हैं, बल्कि 4×400 मीटर रिले में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में भारतीय 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा रहते हुए 3:27.85 का समय दर्ज किया था। इससे पहले 24 अप्रैल 2019 को दोहा में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने 3:32.21 का समय दर्ज किया था, जिसमें प्राची शामिल थीं। करीब एक दशक के अपने सफर में उन्होंने व्यक्तिगत दौड़ के साथ रिले स्पर्धा में भी भारत के लिए प्रतिस्पर्धा की है।
ओलंपिक तक पहुंचने का सफर, अब एशियन गेम्स में पदक
प्राची ने लगभग 10 वर्षों की मेहनत के बाद ओलंपिक में भी पदार्पण किया और 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा बनीं। 400 मीटर स्पर्धा के वैश्विक स्तर को समझने के लिए टोक्यो ओलंपिक के परिणामों पर नजर डालें तो अमेरिका ने 3:16.85 के समय के साथ गोल्ड, पोलैंड ने 3:20.53 के साथ सिल्वर और जमैका ने 3:21.24 के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब एशियन गेम्स में 53.21 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीतकर प्राची चौधरी ने अपने सफर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है। किसान परिवार से निकलकर खेल की दुनिया में आगे बढ़ी प्राची की कहानी मेहनत, पारिवारिक सहयोग, मुश्किलों से वापसी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता की मिसाल बनकर सामने आई है।
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Ms. Pooja, |
