खिलाड़ियों की नौकरियों पर डाका!

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पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय चैंपियन बिहार की रगबी टीम की एक नॉनप्लेइंग खिलाड़ी की धोखाधड़ी की खबर जोर शोर से वायरल हो रही है l खबर है कि यह तथाकथित खिलाड़ी किसी भी स्तर पर कोई भी खेल नहीं खेली l राष्ट्रीय चैंपियन टीम का हिस्सा भी नहीं थी लेकिन अन्य खिलाड़ियों की तरह उसे भी नौकरी मिल गई l इसलिए क्योंकि उसके पतिदेव बिहार रगबी एसोसिएशन में उच्च अधिकारी हैं l लेकिन अब पति पत्नी का फ़र्ज़ीवाड़ा जोर पकड़ रहा है l उन पर धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध हो चुके हैं l नौकरी जाने के साथ फ़र्ज़ीवाड़े का मामला भी बनता है l
फिलहाल यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि देश के करोड़ों युवा बेरोजगार हैं l बड़ी छोटी तमाम परीक्षाओं पर सेटिंग, धोखाधड़ी और राजनैतिक खिलावाड़ के आरोप लग रहे हैं, जिनके चलते देश के युवा सड़कों पर उतर आए हैं l ऐसे में भला कोई कैसे खिलाड़ियों का हक़ मार सकता है? लेकिन ऐसा हो रहा है l हजारों नहीं, लाखों खिलाड़ी बेरोजगार हैं l खेल उपलब्धियों से अपने गांव, जिले राज्य और राष्ट्र का नाम रोशन करते हैं l उनकी उपलब्धियों पर नेता, सांसद और अन्य अवसरवादी अकड़ धकड़ दिखाते हैं, ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे कप और मेडल खिलाड़ी ने नहीं उन्होंने जीता हो l लेकिन राज्य और देश का सम्मान बढ़ाने वाला खिलाड़ी जब खेल के उतार पर होता है, बेरोजगार होता है और मंत्री – प्रधान मंत्री से नौकरी और रोजगार की बात करता है तो उसे मिलता है कोरा आश्वासन, लारे लप्पे और झूठ l दूसरी तरफ फ़र्ज़ी खिलाड़ी, ऊँची पहुँच वाले या मोटा पैसा देने की हैसियत रखने वाले खेल कोटे की नौकरियां पा जाते हैं l
हालांकि एक समय खिलाड़ियों के लिए पांच फीसदी कोटा तय था तब रेलवे, बैंक, बीमा कंपनियों, ऑडिट, कस्टम, खाद्य निगम, पुलिस, सेना, वायुसेना, नौसेना, सीमा बल, परिवहन निगम और तमाम सरकारी और गैर सरकारी विभागों में सैकड़ों और हजारों खिलाड़ी कार्यरत थे और साधन सुविधाओं के अभाव के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने खूब नाम कमायाl देश ने उनकी उपलब्धियों का सम्मान किया और नौकरियों से नवाजा l लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य की तरह बेरोजगार खिलाड़ियों की तादात बढ़ती जा रही है l दूसरी तरफ फ़र्ज़ी खिलाड़ियों द्वारा नौकरी पाने की घटनाएं बढ़ रही हैंl हैरानी वाली बात यह है कि मोटा चढ़ावा चढ़ाने वाले फ़र्ज़ी और कम उपलब्धियों वाले खिलाड़ी भी चढ़ावे की डगर चल कर सरकारी नौकरियां पा जाते हैं l ताज़ा घोटाला आपके सामने है l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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