देश का सबसे फिसड्डी, नाकारा, निक्क्मा और पिछड़ा खेल कौनसा है? यदि यह सवाल कुछ भुक्त भोगियों से पूछेंगे तो तपाक से जवाब मिलेगा’ फुटबॉल ‘ l पता नहीं जवाब से कितने लोग सहमत होंगे लेकिन देश के फुटबाल खिलाड़ियों, क्लबों और अकादमियों की सोच भी कुछ ऐसी ही है l इसलिए क्योंकि दिन पर दिन, साल दर साल, मैच दर मैच और टूर्नामेंट दर टूर्नामेंट भारतीय फुटबाल की सिकुड़न जारी है l लाख कोशिशों के बाद भी सुधार नहीं हो पा रहा हैl नतीजन भारतीय फुटबाल को संचालित करने वाली फेडरेशन भी हॉकी के नक़्शे कदम पर चलने पर विचार कर रही है l उड़ती उड़ती खबर है कि एआईएफएफ भी ड्रेस चेंज करने के मूड में है और रंग वही केसरिया हो सकता है l
सूत्रों की मानें तो फेडरेशन फिलहाल बड़ी मुसीबत का सामना कर रही हैl राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन लगातार गिर रहा है तो निचले वर्ग में भी हालात खराब हैं l क्योंकि प्रतिभाएं सामने नहीं आ रहीं, बड़े आयोजनों में भाग लेने के मौके घटते जा रहे हैं और स्थापित क्लब बंद हो रहे हैं इसलिए खिलाड़ियों और क्लबों का ध्यान भटकाने के लिए हॉकी जैसी चाल चलने की शुगबुगाहट सुनाई दिखाई पड़ रही है l इस खबर में कितनी सच्चाई है कहना मुश्किल है लेकिन यदि ड्रेस बदलने की प्रक्रिया शुरू होती है तो फुटबाल खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का ध्यान भटकाया जा सकता है l
कुछ लोगों का मानना है कि फिलहाल फुटबाल प्रशासन की नज़र अपने खेल की बजाय हॉकी पर ज्यादा है l इसलिए क्योंकि केसरिया धारण कर हाकी टीम वर्ल्ड कप जीत जाती है या पहले तीन देशों में स्थान बनाती है तो भारतीय हॉकी का केसरिया रंग पक्का हो जाएगा l कोई माई का लाल चुनौती नहीं दे सकता l इस नतीजे का सीधा असर यदि फुटबाल और अन्य खेलों पर भी पड़े तो हैरानी नहीं होगी l ऐसे में फुटबाल को हॉकी के प्रदर्शन का इन्तजार रहेगा l यह बात अलग है कि हॉकी नीली टूर्फ़ पर खेली जाती है जबकि फुटबाल प्राय हरी घास के मैदान और कभी कभार हरे टर्फ पर भी खेली जाती है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
