New Delhi: आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय रोइंग के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सलमान खान और सतनाम सिंह की भारतीय जोड़ी ने पुरुषों की डबल स्कल्स स्पर्धा में 6:13.25 के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही भारत ने एशियन गेम्स के इतिहास में पहली बार इस स्पर्धा में पदक जीता। चीन के यी शूदी और नी यिदे ने स्वर्ण, जबकि उज्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव ने रजत पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थी, लेकिन आखिरी 500 मीटर में तीसरे स्थान पर खिसक गई और कांस्य के साथ इतिहास रच दिया।
18 साल की उम्र में पिता को खोया, परिवार के लिए दिल्ली में चलानी पड़ी कैब
सलमान खान की पदक तक पहुंचने की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण रही है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के पूरे धींगई गांव से आने वाले सलमान परिवार में चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान हरियाणा के ताउरू में ट्रक की बॉडी बनाने का काम करते थे। सलमान बचपन से सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे, लेकिन महज 18 साल की उम्र में डेंगू से पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इसके बाद उन्होंने अपना सेना में जाने का सपना कुछ समय के लिए रोक दिया और दिल्ली आकर परिवार का खर्च उठाने के लिए कैब चलाने लगे। दिन-रात मेहनत करने के बावजूद सेना की वर्दी पहनने का उनका सपना उनके भीतर बना रहा।
चार महीने की तैयारी के बाद सेना में भर्ती, फिर शुरू हुआ रोइंग का सफर
सलमान के जीवन में बदलाव तब आया, जब एक दोस्त ने उनकी लंबी कद-काठी और मजबूत शरीर को देखते हुए उन्हें दोबारा सेना की भर्ती में कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। सलमान ने कैब चलाना छोड़कर करीब चार महीने तक कड़ी तैयारी की और भर्ती प्रक्रिया, मेडिकल तथा लिखित परीक्षा पास करने के बाद 25 सितंबर 2018 को पुणे के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में आने के बाद उनके शारीरिक गुणों को देखते हुए कोचों ने उन्हें रोइंग आजमाने के लिए कहा। शुरुआत में यह खेल उनके लिए बिल्कुल नया था और दो बार उन्होंने इसे छोड़ने का मन भी बनाया, लेकिन कोचों के प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ाया। इसके बाद सलमान ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीते। 2022 में नेशनल गेम्स और इंडोर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2023 में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता और 2024 के एशियन रोइंग कप में स्वर्ण के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिली।
आखिरी वक्त में बदली नाव, लेकिन सलमान-सतनाम ने नहीं छोड़ा हौसला
एशियन गेम्स से ठीक पहले भारतीय रोइंग टीम में हुए बड़े बदलाव के कारण सलमान और सतनाम की जोड़ी को पुरुषों की क्वाड्रपल स्कल्स से हटाकर डबल स्कल्स में उतारा गया। यह बदलाव प्रतियोगिता से कुछ ही दिन पहले हुआ था और टीम के कई खिलाड़ियों के इवेंट बदले गए थे। इसके बावजूद सलमान और सतनाम ने नई जोड़ी के तौर पर शानदार तालमेल दिखाया। दोनों पहले से क्वाड्रपल स्कल्स की तैयारी के दौरान साथ ट्रेनिंग कर रहे थे, जिसका फायदा उन्हें डबल स्कल्स में मिला। फाइनल में दोनों ने शुरुआत से ही पदक की दौड़ में खुद को बनाए रखा और 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर रहे। आखिरी 500 मीटर में चीन और उज्बेकिस्तान की जोड़ियों के पीछे रहने के बावजूद भारतीय टीम ने 6:13.25 का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया।
दिल्ली की सड़कों से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंची कहानी
सलमान के लिए यह पदक सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष के बाद हासिल की गई बड़ी कामयाबी है। कभी परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए दिल्ली में कैब चलाने वाले सलमान आज भारतीय सेना के नायब सूबेदार और एशियन गेम्स के पदक विजेता हैं। वहीं, उनके साथी सतनाम सिंह के लिए भी यह एक खास उपलब्धि है, जिन्होंने पहले हैंडबॉल खेला और बाद में रोइंग को अपनाया तथा 2023 में हैंगझोउ एशियन गेम्स में क्वाड्रपल स्कल्स का कांस्य भी जीता था। सलमान और सतनाम की जोड़ी ने मुश्किल परिस्थितियों के बीच मिली नई जिम्मेदारी को अवसर में बदला और भारतीय रोइंग के इतिहास में पुरुषों की डबल स्कल्स स्पर्धा का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम कर लिया।
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Ms. Pooja, |
