पिछले कुछ दशकों से भारतीय फुटबाल अपने सबसे ख़राब और शर्मनाक दौर से गुजर रही हैl सवाल सिर्फ प्रदर्शन में गिरावट का. नहीं है l आलम यह है कि बहुत से स्थापित और नामी क्लब आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और बंद होने की कगार पर हैं या जैसे तैसे चल रहे हैं l कुछ एक लीग से हट रहे हैं तो कुछ ISL से दूर हट कर बस युवा टीम चलाने तक सिमट रहे हैं l सबसे बड़ा झटका जमशेदपुर एफसी का ISL सीजन 2026-27 से हटने के रूप में लगा है l क्लब ने 2021-22 में ISL जीता था लेकिन इस बार लीग फीस जमा नहीं कराई है l ज़ाहिर है देश के फुटबाल प्रेमियों को चिंता सत्ता रही है, खिलाड़ी हैरान परेशान हैं लेकिन भारतीय फुटबाल को नर्क में धकेलने वाली AIFF चैन की बंसी बजा रही है l
जमशेदपुर एफसी ऐसा अकेला क्लब नहीं है l.मुंबई सिटी एफसी, हैदराबाद एफसी, चर्चिल ब्रदर्स, एस ए तिरुर की माली हालात भी दयनीय है l वितीय कमी के चलते कई क्लब दम तोड़ने की कगार पर खड़े हैंl ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भारतीय फुटबाल का प्रदर्शन गिर रहा है, AIFF कलबों पर अनावश्यक दबाव डाल रहा है और कठोर शब्दों में कहें तो भारतीय फुटबाल को संचालित करने वाली शीर्ष इकाई के नाकारापन के चलते पूरा ढांचा गल सड़ गया है l यह भी सच्चा है कि टीवी स्पोंसर और टिकट से पर्याप्त पैसा नहीं मिल रहा और दर्शक संस्कृति दयनीय हालत पार कर चुकी है l इस अवस्था को फुटबाल की मौत कहा जाने लगा है l
जानकारों और पूर्व खिलाड़ियों के अनुसार भारतीय फुटबाल की ताज़ा हालत उस दौर की याद ताज़ा करती है जब जेसीटी, डीसीएम, महिंद्रा, ओरके, डेम्पो, सलगांवकर जैसे संस्थागत क्लब गायब होते चले गए l खिलाड़ियों की भर्ती नहीं हो पाने के चलते, बैंक, पुलिस, सेना और तमाम विभागीय टीमों ने दम तोड़ दिया l फुटबाल फेडरेशन की लूट और नाकारापन के कारण और फुटबाल की आड़ में यश कीर्ति लूटने का खेल खेलने वाले बड़े औद्योगिक घरानों के छलावे ने देश की फुटबाल को बर्बाद कर दिया है l चूंकि संकट गहरा गया है और निकासी का कोई रास्ता भी नज़र नहीं आता इसलिए अब तो बस शव यात्रा बाकी है l जब टाटा समूह पीछे हटे, सिटी ग्रुप हाथ खड़े कर दे , खिलाड़ी वेतन के लिए आवाज़ उठाएं और प्रबंधन और मॉडल ध्वस्त हो जाएं तो भारतीय फुटबाल का बचना मुश्किल है l मौत की खबर आती ही होगी……!
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
