एशियन गेम्स: हिमाचल की होनहार बेटी सीमा ने 10 हजार मीटर दौड़ में रचा इतिहास, 16 साल का सूखा खत्म कर जीता ब्रॉन्ज

Sports News 8 1

एशियाई खेलों के महाकुंभ से भारत के लिए एक बेहद गर्व करने वाली और दिल को छू लेने वाली खबर आई है। खेल के मैदान पर जब कोई खिलाड़ी अपनी मिट्टी की खुशबू और असीम संघर्ष को साथ लेकर उतरता है, तो उसकी जीत सिर्फ एक मेडल नहीं रह जाती बल्कि इतिहास बन जाती है। कुछ ऐसा ही कमाल हिमाचल प्रदेश की रहने वाली लंबी दूरी की धावक सीमा ने कर दिखाया है। महिलाओं की 10,000 मीटर यानी दस किलोमीटर की इस बेहद कठिन और लंबी दौड़ स्पर्धा में सीमा ने अपनी जांबाज दौड़ से ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया है। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही देश का इस स्पर्धा में पिछले 16 सालों से चला आ रहा लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है।

पहाड़ों की बेटी का कड़े मुकाबले में अदम्य साहस

इस रेस में दुनिया के कोने-कोने से आई सबसे तेज और अनुभवी धावक हिस्सा ले रही थीं, जिनके कदम ट्रैक पर बिजली की तरह चल रहे थे। मुकाबला शुरू होते ही गति बहुत तेज हो गई थी और हर सेकंड के साथ खिलाड़ियों के बीच आगे निकलने की होड़ मची थी। हिमाचल की ठंडी वादियों से निकलकर इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंची सीमा ने जरा भी घबराहट नहीं दिखाई। उन्होंने अपनी चाल को बहुत सोच-समझकर और रणनीति के तहत आगे बढ़ाया। जब रेस के आखिरी और सबसे थकान भरे पल चल रहे थे, तब कई धावकों की सांसें फूलने लगी थीं, लेकिन सीमा के पैरों की रफ्तार और उनका हौसला और ज्यादा मजबूत हो गया। उन्होंने अपनी आखिरी ताकत झोंकते हुए फिनिश लाइन को पार किया और तीसरा स्थान पक्का कर लिया।

साधारण पृष्ठभूमि से लेकर पोडियम तक का प्रेरणादायक सफर

एक छोटे से इलाके और बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सीमा के लिए यहां तक पहुंचना किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है। सुबह की धुंध में कच्चे रास्तों पर दौड़ने से लेकर बड़े स्टेडियमों के लाल सिंथेटिक ट्रैक तक का उनका यह सफर अनगिनत पसीने की बूंदों और कभी हार न मानने वाली जिद की कहानी है। उनके घर-परिवार और आसपास के लोगों ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज जब उनके गले में यह चमचमाता हुआ ब्रॉन्ज मेडल सजा है, तो न सिर्फ उनके माता-पिता बल्कि पूरा देश उनकी इस मेहनत को सलाम कर रहा है।

सोलह साल के लंबे खालीपन को सीमा ने भरा

खेल के इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि एशियाई खेलों की इस लंबी दौड़ में भारत के हाथ लंबे समय से खाली थे। साल 2010 के बाद से इस कैटेगिरी में देश को पोडियम पर खड़े होने का मौका नहीं मिला था। सीमा ने उस पुराने इतिहास को पीछे छोड़ते हुए नया पन्ना लिख दिया है। इस साल के खेलों में भारत के लिए एथलेटिक्स का यह पहला मेडल है, जिसने बाकी सभी खिलाड़ियों के दिलों में भी एक नया जोश भर दिया है। इस जीत के बाद से हिमाचल प्रदेश समेत पूरे देश में जश्न का माहौल है और हर कोई इस बेटी की सफलता की गाथा गा रहा है।

××××××××××××××
Telegram Link :
For latest news, first Hand written articles & trending news join Saachibaat telegram group

https://t.me/joinchat/llGA9DGZF9xmMDc1

Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *