उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बसे बाबा केदारनाथ के दर्शन की चाह रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। इस साल की केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन और स्थानीय टीमें युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटी हुई हैं जिसका परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। कड़ी मेहनत और आधुनिक मशीनों की मदद से केदारनाथ पैदल मार्ग और धाम परिसर से लगभग 80 प्रतिशत बर्फ को पूरी तरह से हटा लिया गया है। यह कोई साधारण काम नहीं था क्योंकि इस बार भारी बर्फबारी की वजह से कई जगहों पर बर्फ की मोटी दीवारें खड़ी हो गई थीं जिन्हें काटकर रास्ता बनाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था।
आस्था के आगे पिघली बर्फ की दीवारें
केदारनाथ धाम में चारों ओर बिखरी सफेद बर्फ की चादर अब धीरे-धीरे सिमटने लगी है। पिछले कई हफ्तों से मजदूर और इंजीनियर शून्य से नीचे के तापमान में भी लगातार काम कर रहे हैं ताकि देश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पैदल मार्ग पर जहां कभी कई फीट ऊंची बर्फ जमी थी वहां अब श्रद्धालुओं के चलने लायक रास्ता तैयार हो चुका है। धाम के मुख्य परिसर में भी सफाई का काम जोरों पर है और मंदिर की भव्यता एक बार फिर निखर कर सामने आने लगी है। इस बार की बर्फबारी ने रास्तों को काफी नुकसान पहुंचाया था जिसे दुरुस्त करने के लिए दिन-रात एक किया जा रहा है।
22 अप्रैल को खुलेंगे बाबा के द्वार
जैसे-जैसे समय करीब आ रहा है रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक की रौनक बढ़ती जा रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार आगामी 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ के कपाट पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ खोल दिए जाएंगे। प्रशासन का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि कपाट खुलने के पहले दिन तक सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे पीने का पानी बिजली और ठहरने की व्यवस्था को पूरी तरह सुचारू कर दिया जाए। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि प्रकृति और आस्था के इस संगम में भक्तों का अनुभव यादगार और सुरक्षित बना रहे।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी मशविरा
यद्यपि तैयारियां अंतिम चरण में हैं लेकिन केदारनाथ की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यात्रियों को भी अपनी ओर से सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। कपाट खुलने के शुरुआती दिनों में मौसम में ठंडक काफी ज्यादा रह सकती है इसलिए यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां साथ रखने का सुझाव दिया गया है। केदारनाथ की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक सफर नहीं बल्कि खुद को प्रकृति के करीब लाने और महादेव के चरणों में आत्मसमर्पण करने का एक अनूठा अवसर है जिसके लिए अब पूरा उत्तराखंड बाहें फैलाकर भक्तों का स्वागत करने को तैयार है।
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