पिछले 24 घंटों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच एक दो-हफ़्ते के अस्थायी युद्ध-विराम पर सहमति बन गई है। यह समझौता तब हुआ जब ट्रंप द्वारा दी गई अंतिम चेतावनी खत्म होने में महज कुछ ही घंटे बचे थे।
विनाश की चेतावनी और पाकिस्तान की मध्यस्थता
मंगलवार शाम को स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी। उन्होंने ईरान के बिजली घरों और पुलों को नष्ट करने की योजना बना ली थी। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व की मध्यस्थता के बाद ट्रंप ने अपने हमले के आदेश को दो सप्ताह के लिए टालने का फैसला किया।
युद्ध-विराम की मुख्य शर्तें
इस समझौते के तहत कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: ट्रंप ने शर्त रखी है कि ईरान को तुरंत और सुरक्षित तरीके से इस समुद्री रास्ते को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोलना होगा। हमलों पर रोक: ईरान ने सहमति जताई है कि यदि उन पर हमले रुकते हैं तो वे भी दो हफ्ते तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।डिप्लोमेसी का मौका: इन 14 दिनों का उपयोग एक स्थायी शांति समझौते पर बातचीत करने के लिए किया जाएगा। वैश्विक प्रभाव और आर्थिक राहतइस सीजफायर की खबर से वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली है। क्योंकि दुनिया के तेल का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है इसलिए युद्ध टलने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा फिलहाल टल गया है अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस कदम का स्वागत किया है हालांकि उन्होंने इसे केवल एक शुरुआत बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला उनकी सख्त सौदेबाजी की नीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि यह शांति अस्थायी है लेकिन इसने दुनिया को एक बड़े युद्ध की आग में झुलसने से बचा लिया है। अब सबकी निगाहें आने वाले 14 दिनों पर हैं कि क्या कूटनीति इस युद्ध को स्थायी रूप से खत्म कर पाएगी या नहीं।
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