पश्चिम बंगाल की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह से एक्शन में नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्य के बड़े अधिकारियों और सचिवों के साथ अपनी पहली आधिकारिक बैठक में एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि अब प्रशासन में चमचागिरी और जी-हुजूरी का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने अफसरों को अपनी काबिलियत के आधार पर स्वतंत्र होकर बड़े फैसले लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरा भरोसा दिलाया है कि अगर वे जनता और राज्य के भले के लिए काम करते हैं तो उन्हें किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
अफसरों को मिली काम करने की आजादी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और ईमानदारी लाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि अधिकारी सत्ताधारी दल के नेताओं को खुश करने के चक्कर में जरूरी नियमों की अनदेखी कर देते हैं लेकिन अब नई सरकार में ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा। शुभेंदु अधिकारी ने सभी सचिवों को पूरी आजादी देते हुए कहा कि आप सरकारी फाइलों पर अपनी सच्ची राय बिना किसी डर के लिखें। उन्होंने अफसरों को याद दिलाया कि वे केवल देश के संविधान और कानून के प्रति जवाबदेह हैं न कि किसी खास नेता या व्यक्ति के प्रति। इस बड़े कदम को बंगाल के प्रशासनिक सिस्टम को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी शुरुआत माना जा रहा है।
जनता के काम रोकने वालों की खैर नहीं
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना ही चाहिए। उन्होंने अफसरों को सख्त चेतावनी दी कि फाइलों को बेवजह रोककर रखने या उन पर कुंडली मारकर बैठने की पुरानी आदत अब बदलनी होगी। सीएम ने कहा कि विकास के कामों में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दफ्तरों से निकलकर सीधे जमीन पर जाएं और वहां की हकीकत देखें ताकि सरकारी योजनाओं की असली रिपोर्ट सामने आ सके।
बदली हुई कार्यशैली का साफ संकेत
शुभेंदु अधिकारी का यह कड़ा रुख बताता है कि वह बंगाल की पूरी कार्यसंस्कृति को बदलने का मन बना चुके हैं। उन्होंने अफसरों से अपील की कि वे अपने विवेक और दिमाग का इस्तेमाल करें और केवल हां में हां मिलाने वाले यस मैन बनकर न रहें। मुख्यमंत्री के इस तेवर से जहां कुछ विभागों में हड़कंप मचा हुआ है वहीं दूसरी तरफ ईमानदार अधिकारियों के बीच एक बहुत ही सकारात्मक संदेश गया है।
विकास और सुरक्षा पर रहेगा पूरा फोकस
बैठक के आखिर में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनकी सरकार का एकमात्र लक्ष्य बंगाल को तरक्की की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। इसके लिए उन्होंने कानून व्यवस्था को और मजबूत करने और राज्य में नए उद्योगों के लिए रास्ता साफ करने के निर्देश दिए हैं। उनका मानना है कि जब प्रशासन पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेगा तभी राज्य सही मायनों में तरक्की कर पाएगा। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री की इस खुली छूट के बाद बंगाल की अफसरशाही में कितनी तेजी और सुधार देखने को मिलता है।
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