46 डिग्री की झुलसाने वाली लू और कमजोर मानसून का दोहरा संकट: मौसम विभाग ने दी देश को बड़ी चेतावनी

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नई दिल्ली। भारत इस समय मौसम के दोहरे और बेहद गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के सामने आने वाले कठिन मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। एक तरफ जहाँ उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने वाली भीषण लू (Heatwave) की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशांत महासागर में उभर रहे अल नीनो (El Niño) के साए के कारण इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने की आशंका गहरा गई है।

प्रशासन ने इस दोहरी चुनौती को देखते हुए कृषि और बिजली विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर भारत में 46 डिग्री का टॉर्चर, जनजीवन बेहाल
देश के मैदानी इलाकों में सूरज के तेवर बेहद आक्रामक हो चुके हैं। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

आसमान छूता पारा: कई मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को खतरे में डाल दिया है।

तपते दिन और गर्म रातें: मौसम विभाग के अनुसार, केवल दिन ही नहीं बल्कि रातें भी सामान्य से अधिक गर्म (Warm Nights) दर्ज की जा रही हैं, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे उमस और तपिश का सामना करना पड़ रहा है।

तेज गर्म हवाओं का अलर्ट: दिन के समय चलने वाली गर्म और शुष्क पछुआ हवाएं (लू) शरीर को झुलसा रही हैं, जिससे हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

मानसून पर अल नीनो का साया, कम बारिश की आशंका

भीषण गर्मी के बीच सबसे परेशान करने वाली खबर देश की लाइफलाइन यानी मानसून को लेकर आई है। आईएमडी के दीर्घावधि पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां सक्रिय हो रही हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकती हैं।

सामान्य से कम बारिश का अनुमान: इस साल देश में सीजनल बारिश सामान्य से कम (लॉन्ग पीरियड एवरेज का लगभग 92%) रहने की संभावना जताई गई है।

खेती-किसानी पर संकट: भारत में लगभग 60% खेती आज भी पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर है। अगर अगस्त और सितंबर के महीनों में बारिश कमजोर रहती है, तो खरीफ की फसलों (धान, दलहन और तिलहन) के उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है।

जल संकट की आहट: कमजोर मानसून के कारण देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर गिर सकता है, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हो सकती है।

मौसम विभाग की अहम सलाह और एहतियात
आईएमडी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस कठिन मौसमी चक्र को देखते हुए आम नागरिकों और किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:

1. दोपहर में निकलने से बचें: सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तीखी होती है, तब बहुत जरूरी काम न होने पर खुले आसमान के नीचे जाने से बचें।

2. पानी और तरल पदार्थों का सेवन: लगातार पानी पीते रहें। इसके अलावा छाछ, लस्सी, नींबू पानी और ओआरएस के घोल का इस्तेमाल करें ताकि शरीर में लवणों की कमी न हो।

3. किसानों के लिए चेतावनी: कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही बुआई की योजना बनाएं और जल संचयन के पारंपरिक तरीकों को अपनाएं।

46 डिग्री की यह जानलेवा गर्मी और कमजोर मानसून का यह शुरुआती संकेत भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है, जिससे पावर ग्रिड पर भी दबाव बढ़ रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आसन्न कृषि और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क्या रणनीतिक कदम उठाती है।

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