दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अगर दोपहर तक स्थिति का समाधान नहीं हुआ, तो अदालत को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित अधिकारियों से पूछा कि आखिर किन कारणों से मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और आम लोगों को इससे हो रही परेशानियों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। सीजेआई ने कहा कि लाखों यात्री रोजाना मेट्रो पर निर्भर रहते हैं, इसलिए लंबे समय तक स्टेशन बंद रखना गंभीर चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके नाम पर लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि वे जल्द से जल्द व्यावहारिक समाधान निकालें और स्थिति सामान्य करने की कोशिश करें।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अचानक स्टेशन बंद होने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा और कार्यालयों व जरूरी कामों के लिए समय पर पहुंचना मुश्किल हो गया।
इस पर सीजेआई ने कहा कि अदालत फिलहाल प्रशासन को समाधान निकालने का अवसर दे रही है, लेकिन अगर तय समय तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो न्यायालय उचित आदेश जारी करने पर विचार करेगा।
सुनवाई के बाद संबंधित एजेंसियों के बीच बैठकें शुरू हो गईं और मेट्रो सेवाओं को सामान्य करने के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। फिलहाल यात्रियों की नजर इस बात पर है कि दोपहर तक प्रशासन क्या फैसला लेता है और क्या बंद स्टेशन दोबारा खोले जाएंगे।
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