पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने इसे ‘गुड न्यूज’ करार देते हुए संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ लंबे समय से अटकी शांति वार्ता इस शुक्रवार यानी आज दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप के इस रुख ने उन आशंकाओं को फिलहाल टाल दिया है जिनमें युद्ध के और भीषण होने का अंदेशा जताया जा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि पाकिस्तान के अनुरोध पर उन्होंने सीजफायर (युद्धविराम) को फिलहाल अनिश्चित काल के लिए विस्तार दे दिया है ताकि तेहरान को अपना अंतिम प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके। ट्रंप का मानना है कि उनकी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और नौसैनिक घेराबंदी की नीति काम कर रही है और ईरान अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर है।
तेहरान का रुख: “जब तक घेराबंदी है तब तक कोई समझौता नहीं”
ट्रंप के दावों के विपरीत तेहरान से आ रही प्रतिक्रियाएं काफी सख्त हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ट्रंप के दावों को ‘मीडिया वॉर’ करार दिया है। तेहरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) पूरी तरह खत्म नहीं करता तब तक किसी भी नए समझौते पर हस्ताक्षर करना नामुमकिन है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि घेराबंदी जारी रही तो वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह बंद कर देंगे। तेहरान ने अमेरिका पर ‘अत्यधिक मांगों’ का आरोप लगाते हुए फिलहाल वार्ता में शामिल होने को ‘समय की बर्बादी’ बताया है हालांकि मध्यस्थ देश अभी भी उन्हें मनाने में जुटे हैं।
पाकिस्तान की भूमिका और वार्ता का अनिश्चित भविष्य
इस पूरी कूटनीतिक हलचल में पाकिस्तान एक अहम कड़ी बनकर उभरा है। इस्लामाबाद में होने वाली इस संभावित वार्ता के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शेहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर लगातार दोनों देशों के संपर्क में हैं। ट्रंप ने इन्हीं के अनुरोध पर सीजफायर को आगे बढ़ाया है। हालांकि इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पाकिस्तान दौरा फिलहाल टाल दिया गया है क्योंकि वाशिंगटन अभी ईरान की ओर से किसी ‘एकीकृत और ठोस’ प्रस्ताव का इंतजार कर रहा है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं और यदि ईरान उनकी शर्तों (जैसे परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना) पर राजी नहीं होता तो वे दोबारा सैन्य हमले शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
हॉर्मुज में सस्पेंस और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
शांति वार्ता की इन खबरों का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई थीं लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान के बाद बाजार में थोड़ी स्थिरता देखी गई है। अगर शुक्रवार की यह संभावित वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचती है तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों के लिए बड़ी राहत होगी जिनके जहाज इस युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आज सचमुच कोई ‘गुड न्यूज’ आएगी या फिर बारूद का यह दौर अभी और लंबा चलेगा।
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