दिल्ली और एनसीआर के निवासियों के लिए 14 मई 2026 की सुबह महंगाई का एक बड़ा झटका लेकर आई है। दूध सप्लाई करने वाली देश की दो सबसे बड़ी कंपनियों मदर डेयरी और अमूल ने एक साथ अपने दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला अचानक लिया गया है और आज सुबह से ही दूध के बूथों और दुकानों पर नई कीमतें लागू हो गई हैं। चिलचिलाती गर्मी के बीच दूध के दाम बढ़ने से आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से डगमगा गया है।
क्यों और कैसे बढ़े दाम?
मदर डेयरी ने कीमतों में इस इजाफे के पीछे बढ़ती लागत का हवाला दिया है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार पिछले एक साल में चारे के दाम और ट्रांसपोर्टेशन के खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गर्मी के मौसम में दूध के उत्पादन में प्राकृतिक रूप से कमी आती है जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है। कंपनी ने कहा कि वे अपनी कमाई का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को देते हैं इसलिए किसानों को उनके काम का सही दाम देने के लिए कीमतों में यह मामूली बढ़ोतरी करना उनकी मजबूरी बन गई थी।
नई रेट लिस्ट पर एक नजर
आज से लागू हुई नई दरों के बाद अब मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध 70 रुपये के बजाय 72 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। इसी तरह सबसे ज्यादा बिकने वाला टोंड मिल्क (नीला पैकेट) अब 58 रुपये के बजाय 60 रुपये प्रति लीटर हो गया है। डबल टोंड दूध के लिए अब ग्राहकों को 52 रुपये की जगह 54 रुपये चुकाने होंगे। वहीं गाय के दूध की कीमत भी 60 रुपये से बढ़कर अब 62 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यहाँ तक कि टोकन वाला दूध भी अब 56 रुपये के बजाय 58 रुपये की दर से उपलब्ध होगा।
अमूल ने भी नहीं दी राहत
मदर डेयरी के साथ-साथ अमूल ने भी अपने सभी प्रकार के दूध के पैकेटों पर 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। अमूल गोल्ड अब 68 रुपये के बजाय 70 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। देश की दो बड़ी कंपनियों द्वारा एक साथ दाम बढ़ाए जाने से उन लाखों परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा जिनके यहाँ हर महीने 30 से 60 लीटर दूध की खपत होती है। एक औसत परिवार के मासिक बिल में अब 150 से 300 रुपये तक का इजाफा होना तय है।
बाजार और मध्यम वर्ग पर असर
डेयरी सेक्टर के जानकारों का कहना है कि दूध महंगा होने का असर सिर्फ चाय और कॉफी तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में मिठाई दही पनीर छाछ और घी जैसी अन्य जरूरी चीजों के दामों में भी उछाल देखा जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर में दूध की खपत बहुत ज्यादा है और यहाँ के लोग पहले ही बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। ऐसे में दूध जैसी बुनियादी जरूरत की कीमत बढ़ना मध्यम और गरीब वर्ग की जेब पर एक बड़ा बोझ है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस दिशा में कुछ हस्तक्षेप करती है या जनता को इसी बढ़े हुए खर्च के साथ अपना गुजारा करना होगा।
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