फ्लोरिडा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। रविवार को फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर ईरान ने बदमाशी की या कुछ भी गलत करने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर दोबारा सैन्य हमले शुरू कर सकता है।
समझौते की मेज पर शर्तों की जंग
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
राष्ट्रपति का रुख: उन्होंने कहा कि वे समझौता करना चाहते हैं क्योंकि उनकी हालत खराब हो चुकी है, लेकिन मैं अभी संतुष्ट नहीं हूँ। मुझे समझौते के मसौदे की जानकारी दी गई है, लेकिन मैं शब्दों की बारीकियों को देखना चाहता हूँ।
सैन्य विकल्प खुला: जब उनसे हमलों को फिर से शुरू करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई की संभावना हमेशा बनी हुई है। अगर वे बदमाशी करते हैं, तो हम देखेंगे। यह निश्चित रूप से हो सकता है।
ईरान का 14-सूत्रीय प्रस्ताव क्या है?
ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने जो प्रस्ताव दिया है उसमें कई बड़ी शर्तें रखी गई हैं:
1. सीजफायर: सभी मोर्चों पर युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना।
2. प्रतिबंधों से राहत: अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को हटाना और फ्रीज की गई संपत्ति को वापस करना।
3. हॉर्मुज जलडमरूमध्य: इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग के लिए एक नया सुरक्षा तंत्र बनाना।
4. अमेरिकी सेना की वापसी: क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी की मांग।
ट्रंप की कीमत वाली थ्योरी
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी शंका जाहिर की। उन्होंने लिखा कि उन्हें नहीं लगता कि यह समझौता स्वीकार्य होगा क्योंकि ईरान ने पिछले कई वर्षों में दुनिया को जो नुकसान पहुँचाया है, उसकी उसने अभी पूरी कीमत नहीं चुकाई है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म किए बिना कोई भी समझौता स्थायी नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि हमें कुछ साल बाद फिर से यही सब करना पड़े।
युद्ध शक्तियों और कानूनी दांवपेच
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब युद्ध शुरू हुए 60 दिन पूरे हो रहे हैं। अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति को युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि चूंकि अभी सीजफायर जैसी स्थिति है, इसलिए उन्हें फिलहाल किसी नई विशेष मंजूरी की जरूरत नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र में शांति बेहद नाजुक मोड़ पर है। एक तरफ कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप की चेतावनी ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है।
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