नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण देश की ऊर्जा व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। त्रिशूली और भोटेकोशी नदी बेसिन में भारी बारिश और मलबे के कारण कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं जलमग्न हो गई हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित चालू और निर्माणाधीन करीब 14 जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। इससे नेपाल का लगभग 550 मेगावाट बिजली उत्पादन अचानक ठप हो गया, जो देश की कुल ऊर्जा क्षमता का एक बड़ा हिस्सा है। इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए नेपाल ने भारत से समय से पहले एडवांस बिजली आपूर्ति करने की गुजारिश की है, जिसे भारत ने तुरंत स्वीकार कर लिया है।
समय से पहले भारत से बिजली मांगने की वजह
आमतौर पर भारत और नेपाल के बीच बिजली का आदान-प्रदान मौसम के चक्र पर निर्भर करता है। मानसून और गर्मियों के दौरान नेपाल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे नेपाल अतिरिक्त बिजली बनाकर भारत को बेचता है। इसके विपरीत, सर्दियों के दिनों में जब नदियों का जलस्तर घट जाता है, तब नेपाल भारत से बिजली खरीदता है। यह बिजली आयात आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर के महीने से शुरू होता है। हालांकि, इस बार अचानक आई आपदा के कारण नेपाल का अपना ग्रिड नेटवर्क और पावर प्लांट क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे नेपाल सरकार ने सितंबर से ही एडवांस बिजली आपूर्ति शुरू करने का आपातकालीन अनुरोध किया है।
नेपाल को राहत और भारत की ग्रिड तैयारी
नेपाल के अनुरोध पर संज्ञान लेते हुए भारतीय ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों ने जरूरी प्रक्रियाएं तेज कर दी हैं। भारतीय पावर एक्सचेंज के माध्यम से नेपाल को उसकी मांग के अनुसार अतिरिक्त बिजली मुहैया कराई जा रही है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, नेपाल से भारत को मिलने वाली सप्लाई में करीब 400 मेगावाट की कमी आई है, लेकिन भारत के पास पर्याप्त राष्ट्रीय पावर ग्रिड क्षमता और बैकअप उपलब्ध है।
इस वजह से नेपाल को बिजली देने के बाद भी भारत की अपनी घरेलू बिजली आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत और नेपाल के बीच बनी ढलकेबार-मुजफ्फरपुर 400 केवी क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइन के जरिए नेपाल तक यह आपातकालीन बिजली पहुंचाई जाएगी, जिससे वहां के बिजली संकट को जल्द दूर करने में मदद मिलेगी।
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